सीजी भास्कर, 21 दिसंबर। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक न्यायिक कार्यवाही, बहस और फैसले हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराए जाने की दिशा में गंभीर और सतत प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि आम नागरिक न्यायिक प्रक्रिया को अपनी भाषा में समझ सके और उससे भावनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस कर सके।
उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को पहली बार हिंदी समेत 16 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने की व्यवस्था लागू की गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का अनुवाद (Supreme Court Judgments in Indian Languages) न्याय प्रणाली को अधिक जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
जस्टिस सूर्यकांत शनिवार को हिंदी सेवा निधि द्वारा आयोजित 33वें सारस्वत सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 348, 350 और 351 में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को लेकर जो अपेक्षाएं निर्धारित की गई हैं, सुप्रीम कोर्ट उन्हें व्यवहार में उतारने के लिए पूरी तरह सजग है। कोर्ट का प्रयास है कि उसकी कार्यवाही, आदेश, बहस और फैसले आम जनता को उसी भाषा में मिलें, जिसे वे सहज रूप से समझ सकें।
वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट हिंदी, तमिल और कन्नड़ सहित 16 भाषाओं में फैसलों की प्रति उपलब्ध करा रहा है, जिसे आगे और भाषाओं तक विस्तारित किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का अनुवाद (Supreme Court Judgments in Indian Languages) इस दिशा में न्यायिक इतिहास का अहम अध्याय बन रहा है।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए कहा कि न्यायाधीश के रूप में व्यस्तताओं के कारण वे साहित्यिक गतिविधियों से दूर हो गए, हालांकि साहित्य और भाषा के प्रति उनका अनुराग हमेशा बना रहा। उन्होंने अपने छात्र जीवन का एक प्रसंग सुनाते हुए एक पंक्ति भी साझा की पोछ दी हैं अर्थ की सब तख्तियां, अब मदरसा जाऊंगा किस वास्ते।
समारोह में यह भी घोषणा की गई कि अगले वर्ष से पूर्व रक्षा मंत्री रहे मुलायम सिंह यादव और जॉर्ज फर्नांडीस के नाम पर सैन्य पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाएगा, जिन्होंने सैन्य सेवाओं में रहते हुए हिंदी के उन्नयन में योगदान दिया हो।
हिंदी सेवा निधि की स्थापना वर्ष 1992 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश स्व. प्रेम शंकर गुप्त ने की थी, जिन्होंने न्यायालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में हास्य कवि डा. सुरेंद्र शर्मा को न्यायमूर्ति प्रेम शंकर गुप्त जनवाणी सम्मान सहित साहित्य, कला, चिकित्सा, प्रशासन और खेल के क्षेत्र में योगदान देने वाली कई विभूतियों को सम्मानित किया गया।





