Supreme Court Rejects Plea on Baswaraju Cremation:नक्सल आंदोलन (Naxal Movement) का शीर्ष नेता कहे जाने वाले बसवराजू (Baswaraju) के परिजनों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उनके शव को परिजनों को सौंपने की मांग की गई थी।
नक्सल आंदोलन का शीर्ष चेहरा था बसवराजू
आंध्र प्रदेश निवासी नम्बाला केशव राव (Nambala Keshav Rao), जिन्हें आमतौर पर बसवराजू (Baswaraju ) कहा जाता था, को नक्सलियों का वैचारिक आधारस्तंभ माना जाता था। मई 2025 में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में उनकी मौत हुई थी।
26 मई को नारायणपुर में बसवराजू और सात अन्य नक्सली कार्यकर्ताओं का सामूहिक अंतिम संस्कार प्रशासन द्वारा किया गया। इसी पर उनके परिजनों ने आपत्ति जताई थी।
परिजनों का आरोप – शव और अस्थियां नहीं मिलीं
Supreme Court Rejects Plea on Baswaraju Cremation: बसवराजू के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ के जिन नक्सलियों की मौत हुई, उनके शव परिजनों को सौंप दिए गए, लेकिन आंध्र प्रदेश से आने वाले बसवराजू के परिवार को यह अधिकार नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक मृतक की अस्थियां तक परिजनों को नहीं दी गईं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने साफ कहा कि यह मामला अवमानना याचिका के जरिए हल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने वकील को सुझाव दिया कि इस विषय पर उचित कार्यवाही अन्य माध्यमों से करें। पीठ ने यह भी माना कि हाईकोर्ट द्वारा अवमानना कार्यवाही बंद करना सही फैसला था।
बसवराजू पर था करोड़ों का इनाम
Supreme Court Rejects Plea on Baswaraju Cremation: छत्तीसगढ़ पुलिस ने बसवराजू पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था। नक्सल आंदोलन (Naxal Movement ) को दिशा देने वाला यह नेता कई वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियों की निगाह से बचता रहा। आखिरकार, बस्तर की मुठभेड़ में उसकी मौत के बाद नक्सल संगठन को बड़ा झटका माना जा रहा है।





