सीजी भास्कर, 16 फरवरी। 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराए गए गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका (Supreme Court Verdict) लगा है। शीर्ष अदालत ने उसकी अग्रिम रिहाई की याचिका खारिज कर दी है। इससे पहले करीब 10 दिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट भी उसकी जमानत याचिका खारिज कर चुका था।
अबू सलेम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दलील दी थी कि पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के दौरान हुए समझौते के अनुसार उसे 25 वर्ष से अधिक की सजा नहीं दी जा सकती। याचिका में यह भी कहा गया था कि वह 25 वर्ष या उससे अधिक समय जेल में बिता चुका है, इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए सख्त टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि अबू सलेम को टाडा (आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां अधिनियम) के तहत सजा दी गई है और वह किसी सामाजिक सेवा के उद्देश्य से जेल (Supreme Court Verdict) में नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सजा की गणना और दस्तावेजों से जुड़े मुद्दों पर बॉम्बे हाई कोर्ट ही विचार करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत या शीघ्र सुनवाई के लिए हाई कोर्ट का रुख करने को कहा।
गौरतलब है कि 10 दिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी अबू सलेम की इमरजेंसी पैरोल याचिका खारिज कर दी थी। उसने अपने भाई के निधन के बाद आजमगढ़ जाकर अंतिम संस्कार और धार्मिक रीति-रिवाजों में शामिल होने के लिए पैरोल मांगी थी, लेकिन वह पुलिस एस्कॉर्ट चार्ज के रूप में मांगे गए 17.60 लाख रुपये जमा नहीं कर सका। इसी कारण उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
अबू सलेम को वर्ष 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया (Supreme Court Verdict) गया था। वह 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इस हमले में 250 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अबू सलेम को जेल में ही रहना होगा।





