सीजी भास्कर 1 जनवरी। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से सामने आई यह तस्वीर किसी एक परिवार (Surguja District ) की पीड़ा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत पर खड़े सिस्टम की कठोर कहानी बयां करती है। सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम भारतपुर–लकरा लता में एक आदिवासी युवक की मौत के बाद उसके परिजन शव को खाट में रखकर कांवड़ के सहारे कई किलोमीटर तक पैदल ढोने को मजबूर हुए। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
तालाब में डूबने से गई जान
जानकारी के मुताबिक, ग्राम लकरा लता निवासी आदिवासी युवक सुरेंद्र तिर्की की तालाब में डूबने से मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा था, लेकिन असली चुनौती इसके बाद शुरू हुई। गांव तक सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण एंबुलेंस या किसी भी वाहन का पहुंचना संभव नहीं था।
पोस्टमार्टम के लिए खाट बनी सहारा
परिजन और ग्रामीणों ने मिलकर युवक के शव को खाट पर रखा और फिर कांवड़ के जरिए उसे उठाकर पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया। पथरीले रास्ते, जंगल और ढलान पार करते हुए यह सफर न सिर्फ शारीरिक रूप से कठिन था, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला भी।
वायरल वीडियो ने उठाए सवाल
इस दृश्य का वीडियो सामने आते ही प्रशासनिक दावों और विकास के आंकड़ों पर सवाल खड़े हो गए। लोग पूछ रहे हैं कि जब सड़क, स्वास्थ्य और आपात सेवाएं अब भी गांव तक नहीं पहुंच पाईं, तो योजनाओं का असली लाभ किसे मिल रहा है?
स्थानीय लोगों का आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार सड़क निर्माण की मांग की, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले। उनका आरोप है कि चुनाव के समय नेता गांव तक पहुंचते हैं, लेकिन बाद में बुनियादी सुविधाएं फिर हाशिये पर चली जाती हैं। यह घटना एक बार फिर बताती है कि कागजों में चल रहा विकास, ज़मीन पर कब उतरेगा—यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।


