सीजी भास्कर, 21 मार्च। छत्तीसगढ़ में खेल आयोजन अब सियासत का अखाड़ा बनता (Surguja Olympic Controversy) दिख रहा है। बस्तर ओलंपिक के बाद अब सरगुजा ओलंपिक को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस और भाजपा के शीर्ष नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल गरमा दिया है।
बैज का आरोप – पहले घोटाले पर दें जवाब
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरगुजा ओलंपिक से पहले सरकार को यह भरोसा देना चाहिए कि इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं होगी।
उन्होंने सवाल उठाया कि बस्तर में हुए आयोजन को लेकर पहले ही विवाद सामने आ चुके हैं, ऐसे में सरकार पारदर्शिता की गारंटी दे। बैज ने यह भी कहा कि मार्च-अप्रैल की गर्मी में इस तरह का आयोजन करना युवाओं के साथ अन्याय है, क्योंकि इस समय परीक्षाएं भी चल रही हैं और मौसम भी अनुकूल नहीं है।
CM साय का जवाब-‘जिन्होंने लूटा, वो हमें न सिखाएं’
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इन आरोपों पर तीखा (Surguja Olympic Controversy) पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग पांच साल तक प्रदेश की व्यवस्था संभालते रहे, उन्हें अब सरकार को सलाह देने का कोई अधिकार नहीं है। साय ने कहा कि सरगुजा ओलंपिक के जरिए ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को मंच दिया जा रहा है, ताकि उनकी प्रतिभा सामने आ सके।
तीन दिन का बड़ा आयोजन, कई कार्यक्रम साथ-साथ
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि सरगुजा ओलंपिक का आयोजन तीन दिनों तक संभाग स्तर पर किया जा रहा है। इसके साथ ही-
अंबिकापुर में कृषक सम्मेलन
कुदरगढ़ महोत्सव
जैसे बड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।
खेल से ज्यादा राजनीति गर्म
सरगुजा ओलंपिक को लेकर जहां एक ओर सरकार इसे प्रतिभा (Surguja Olympic Controversy) मंच बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लेकर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।


