सीजी भास्कर, 12 जनवरी। बिलासपुर के पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना (Swami Atmanand Yojana) को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार आठ शिक्षकों का भार नहीं उठा पा रही है, तो उसने सीधे तौर पर 200 मासूम बच्चों का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। शैलेष पांडेय ने कहा कि स्वामी आत्मानंद योजना के तहत पढ़ने वाले नर्सरी के बच्चों के भविष्य को न तो कलेक्टर बचा पाए और न ही जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ)।
शैलेष पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार स्वामी आत्मानंद योजना (Swami Atmanand Yojana) की लोकप्रियता से कभी खुश नहीं रही। कांग्रेस शासन की यह योजना प्रदेश की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक रही, जिसने हजारों गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के भविष्य को संवारने का ऐतिहासिक संकल्प लिया था। इसी संकल्प के तहत पूरे प्रदेश में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल खोले गए, जिससे उन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और निशुल्क शिक्षा मिली, जिनके माता-पिता निजी स्कूलों की महंगी फीस वहन करने में सक्षम नहीं थे।
उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानंद योजना (Swami Atmanand Yojana) भाजपा सरकार के लिए शुरू से ही किरकिरी बनी रही और अंततः सरकार ने नर्सरी के मासूम बच्चों को इसका दंड दे दिया। यह सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य के साथ किया गया खिलवाड़ है। शैलेष पांडेय ने इसे एक सोचा-समझा षड्यंत्र बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार की कभी भी मंशा नहीं रही कि वह स्वामी आत्मानंद योजना को चलाए।
पूर्व विधायक ने कहा कि बिलासपुर में नर्सरी कक्षाओं में मात्र 200 बच्चे पढ़ते हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए केवल आठ शिक्षक हैं। क्या सरकार कहीं से भी उनके वेतन की व्यवस्था नहीं कर सकती थी? क्या डीएमएफ फंड ही एकमात्र सहारा था? यदि डीएमएफ के नियम बदल गए हैं, तो संविदा मद से, जो हर वर्ष लैप्स हो जाता है, उन शिक्षकों को वेतन दिया जा सकता था। लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा।
शैलेष पांडेय ने आरोप लगाया कि बिलासपुर के कलेक्टर ने भी इस मामले में कोई रुचि नहीं ली, जिससे बच्चों की पढ़ाई बंद न हो। उन्होंने कहा कि कलेक्टर को सरकार से बात कर किसी वैकल्पिक मद से भुगतान की व्यवस्था करनी चाहिए थी, ताकि बच्चों का भविष्य बचाया जा सके। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नर्सरी की प्रारंभिक शिक्षा ही बाधित हो जाएगी, तो इन बच्चों का आगे क्या होगा।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पहले भी स्कूल बंद करने की नीति अपनाती रही है और वही ढर्रा एक बार फिर दोहराया जा रहा है। बिलासपुर से शुरू हुई स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना को अब भाजपा सरकार बलि चढ़ाने की शुरुआत कर चुकी है। शैलेष पांडेय ने राज्य सरकार से मांग की है कि बंद किए गए स्वामी आत्मानंद स्कूलों को तत्काल पुनः शुरू किया जाए और मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न किया जाए।


