सीजी भास्कर, 11 जनवरी। छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों की कक्षा चौथी की अंग्रेजी परीक्षा उस वक्त विवादों (Teacher Suspension Chhattisgarh) में आ गई, जब प्रश्नपत्र में शामिल एक साधारण से सवाल ने धार्मिक संवेदनाओं को लेकर बहस छेड़ दी। परीक्षा के बाद मामला तूल पकड़ता गया और अंततः शिक्षा विभाग को सख्त कदम उठाने पड़े। रायपुर संभाग के कई जिलों में यह प्रश्नपत्र वितरित होने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मच गई।
दरअसल, अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र में एक प्रश्न पूछा गया था— “मोना के कुत्ते का नाम क्या है?” इसके उत्तर के लिए चार विकल्प दिए गए थे, जिनमें ‘बाला’, ‘शेरू’, ‘कोई नहीं’ के साथ-साथ ‘राम’ भी शामिल था। जैसे ही यह प्रश्न सामने आया, कुछ संगठनों ने इसे अनुचित बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई और धार्मिक भावनाओं के आहत होने का आरोप लगाया।
यह प्रश्नपत्र रायपुर संभाग के बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिलों के स्कूलों में परीक्षा के दौरान उपयोग में लाया (Teacher Suspension Chhattisgarh) गया था। परीक्षा संपन्न होने के बाद 6 जनवरी को प्रश्नपत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसके बाद विवाद और गहराता चला गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने तत्काल जांच शुरू की। जांच के बाद प्रश्नपत्र तैयार करने वाली प्रधान पाठक शिखा सोनी को निलंबित कर दिया गया, जबकि मॉडरेशन की जिम्मेदारी संभाल रहीं शिक्षिका नम्रता वर्मा को सेवा से पृथक करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, दोनों ने इस त्रुटि को स्वीकार करते हुए लिखित रूप से खेद भी जताया है।
जांच में सामने आया कि प्रश्न तैयार करते समय ‘रामू’ शब्द लिखा (Teacher Suspension Chhattisgarh) जाना था, लेकिन टाइपिंग के दौरान अंतिम अक्षर छूट जाने से ‘RAM’ शब्द छप गया। मॉडरेटर का कहना है कि उन्हें जो प्रश्नपत्र सेट मिला, उसमें यह विकल्प पहले से मौजूद था और उसी के आधार पर मॉडरेशन किया गया।
विवाद के बीच छात्र संगठन एनएसयूआई की रायपुर इकाई ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और इसे केवल तकनीकी चूक मानने से इनकार किया। संगठन ने प्रश्नपत्र निर्माण और मॉडरेशन प्रक्रिया में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती ने विभागीय स्तर पर हुई गलती को स्वीकार करते हुए पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित करने की जानकारी दी है, जो सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं महासमुंद के जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे ने बताया कि जिन प्रश्नपत्रों में यह त्रुटि थी, वे छपाई के दौरान अनजाने में वितरण में आ गए। उन्होंने किसी की भावना आहत होने पर खेद व्यक्त किया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में प्रश्नपत्र निर्माण, मॉडरेशन और वितरण की प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा। साथ ही यह भी संकेत दिए गए हैं कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और कार्रवाई की जा सकती है, ताकि इस तरह की चूक दोबारा न हो।


