रिपोर्ट – आशुतोष सिंह
सीजी भास्कर, 17 मार्च। जिले के राजस्व महकमे में सोमवार को अचानक तेज हलचल देखने (Tehsildar Transfer) को मिली। कलेक्टर बी.एस. उइके ने एक साथ पांच तहसीलदारों के तबादले कर दिए, और इसके साथ ही प्रशासनिक ढांचे को और ज्यादा चुस्त-दुरुस्त बनाने की कोशिश भी साफ नजर आने लगी है। आदेश 16 मार्च को जारी हुआ और बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया।
दफ्तरों के भीतर यह बदलाव सिर्फ कागजी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सीधे तौर पर कामकाज की रफ्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से राजस्व मामलों में बढ़ती लंबित फाइलें और जमीन से जुड़े विवाद प्रशासन के लिए चुनौती बने हुए थे, ऐसे में यह फेरबदल एक जरूरी कदम माना जा रहा है।
कहां किसे मिली जिम्मेदारी, कैसे बदला पूरा समीकरण
जारी आदेश के मुताबिक, फिंगेश्वर में पदस्थ तहसीलदार श्रीमती डिम्पल ध्रुव को अब राजिम भेजा गया है। वहीं मैनपुर के तहसीलदार रमेश मेहता को फिंगेश्वर की कमान सौंपी गई है।
इसी कड़ी में राजिम के तहसीलदार मयंक अग्रवाल को छुरा स्थानांतरित किया गया है, जबकि अमलीपदर में कार्यरत सुशील कुमार भोई को मैनपुर की जिम्मेदारी (Tehsildar Transfer) दी गई है। छुरा के तहसीलदार गेंदलाल साहू को अब अमलीपदर में नई जिम्मेदारी निभानी होगी। यह पूरा बदलाव एक तरह से आपस में जुड़ी कड़ियों जैसा है, जहां हर अधिकारी की नई पोस्टिंग दूसरे के स्थान से सीधे जुड़ी हुई है।
फेरबदल के पीछे की असली वजह क्या है
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो यह बदलाव केवल रूटीन ट्रांसफर नहीं है। इसके पीछे साफ मकसद राजस्व कामकाज को तेज करना और जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करना है।
कई इलाकों में नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे जैसे मामलों की फाइलें महीनों से लंबित थीं। शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं कि आम लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए बार-बार तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में कलेक्टर ने सीधे फील्ड में बदलाव कर सिस्टम को सक्रिय करने का रास्ता चुना है।
तकनीकी निर्देश भी जोड़े गए, संकेत साफ हैं
आदेश में एक महत्वपूर्ण बात यह भी जोड़ी गई है कि सुशील कुमार भोई, जो भू-अभिलेख शाखा से भी जुड़े हैं, उनके वेतन-भत्ते पूर्व पदस्थापना (Tehsildar Transfer) से ही जारी रहेंगे। यह दिखाता है कि प्रशासन केवल पदस्थापना नहीं बदल रहा, बल्कि वित्तीय और तकनीकी संतुलन भी बनाए रखना चाहता है।
अब नजर परिणाम पर, फील्ड में दिखेगी असली तस्वीर
इस फेरबदल के बाद अब असली परीक्षा नए पदस्थ अधिकारियों की होगी। जिन क्षेत्रों में लंबे समय से राजस्व विवाद अटके हुए हैं, वहां काम की रफ्तार बढ़ाने का दबाव साफ रहेगा।
ग्रामीण इलाकों में लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अब तहसील स्तर पर फैसले जल्दी होंगे और दफ्तरों में चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। प्रशासन की मंशा भी यही है कि बदलाव का असर सीधे लोगों तक पहुंचे, सिर्फ आदेश तक सीमित न रह जाए।





