दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि बिजली जैसी आवश्यक सुविधा को मकान मालिक–किरायेदार के विवाद का हथियार नहीं बनाया जा सकता। अदालत के मुताबिक, वैध रूप से किसी संपत्ति में रह रहे व्यक्ति को बिजली से वंचित करना संविधान के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार के विपरीत है। यह टिप्पणी (Tenant Electricity Rights) के दायरे को और स्पष्ट करती है।
Right to Electricity | भुगतान के बाद भी कनेक्शन नहीं—यहीं से उठा सवाल
मामला पश्चिमी दिल्ली की एक रिहायशी इमारत का है, जहां तीसरी मंजिल पर रह रही किरायेदार ने बकाया बिजली बिल चुका दिया, फिर भी सप्लाई बहाल नहीं की गई। किरायेदार का तर्क था कि भुगतान के बावजूद बिजली रोके रखना अनुचित है और यह सीधे तौर पर (Right to Electricity) का उल्लंघन है।
Delhi High Court Ruling | वितरण कंपनी को तत्काल बहाली का निर्देश
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने बिजली वितरण कंपनी को आदेश दिया कि तीसरी मंजिल की बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निजी विवाद के चलते आवश्यक सेवाओं को बाधित करना स्वीकार्य नहीं है। यह (Delhi High Court Ruling) किरायेदारों के अधिकारों की व्याख्या में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
Landlord Tenant Dispute | एनओसी की दलील पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
वितरण कंपनी की ओर से कहा गया कि मीटर मकान मालिक के नाम पर है और बहाली के लिए एनओसी जरूरी है। अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि एनओसी का अभाव बिजली रोकने का आधार नहीं बन सकता, खासकर तब, जब किरायेदार का कब्जा वैध हो। इस टिप्पणी ने (Landlord Tenant Dispute) में शक्ति-संतुलन को स्पष्ट किया।
Tenant Electricity Rights | 2016 की लीज, 2025 का संकट
किरायेदार वर्ष 2016 से पंजीकृत लीज के तहत रह रही थी। आर्थिक कठिनाई के कारण कुछ महीनों के बिल देर से जमा हुए, लेकिन भुगतान उसी दिन कर दिया गया। इसके बावजूद सप्लाई बहाल न होना, अदालत के अनुसार, कानून की भावना के खिलाफ था—और यहीं से (Tenant Electricity Rights) का मुद्दा केंद्र में आया।
Right to Electricity | फैसले का व्यापक असर
इस आदेश को शहरी किरायेदारों के लिए सुरक्षा-कवच के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने संकेत दिया कि बिजली जैसी सुविधा को रोकना न सिर्फ प्रशासनिक चूक है, बल्कि संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार भी है। यह निर्णय (Right to Electricity) की व्यावहारिक व्याख्या करता है।





