सीजी भास्कर, 17 अप्रैल : ईरान-अमेरिका युद्ध का असर (Tilapia Fish Export Crisis) अब छत्तीसगढ़ के मछुआरों पर भी साफ नजर आने लगा है। राज्य से हर साल बड़ी मात्रा में तिलापिया मछली का निर्यात अमेरिका किया जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में करीब 20 हजार टन मछली तालाबों में ही अटकी हुई है (Tilapia Fish Export Crisis)। यदि आने वाले एक-दो महीने तक यही स्थिति बनी रही तो मछुआरों को 200 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह मछली स्थानीय बाजार में कम खपत होती है, इसलिए इसका पूरा उत्पादन निर्यात पर ही निर्भर रहता है ।
मछुआरे इस मछली को खासतौर पर अमेरिका भेजने के लिए ही तैयार करते हैं। कांकेर के दुधावा, कोरबा के बांगो और कवर्धा के सरोदा बांध में बड़े पैमाने पर इसका पालन किया जाता है (Tilapia Fish Export Crisis)। कंपनियां मछुआरों से इसे 105 से 110 रुपए प्रति किलो के भाव में खरीदती हैं, जिसके बाद इसे कोलकाता और विशाखापट्टनम बंदरगाह के जरिए अमेरिका भेजा जाता है, जहां यह 170 रुपए प्रति किलो के हिसाब से एक्सपोर्ट होती है और वहां के बाजार में 250 से 300 रुपए प्रति किलो तक बिकती है। अमेरिका में इसे “एक्वाटिक चिकन” के नाम से भी जाना जाता है।
तिलापिया ही क्यों जाती है अमेरिका
छत्तीसगढ़ के जलाशयों में कई प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जाता है, लेकिन तिलापिया की मांग अमेरिका में सबसे ज्यादा है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि वहां मछली को टुकड़ों में काटकर खाने का चलन कम है और लोग पूरी मछली खाना पसंद करते हैं ।
इसी वजह से 500 से 800 ग्राम तक की मछलियों का ही निर्यात किया जाता है। इससे अधिक वजन होने पर मछली का एक्सपोर्ट नहीं हो पाता। करीब 8 महीने पहले डाले गए बीज अब बड़े होकर 500 ग्राम से अधिक वजन के हो चुके हैं, जिससे मछुआरों की चिंता बढ़ गई है कि अगर मछलियां और बड़ी हो गईं तो उन्हें खरीदेगा कौन ।
दो महीने से ठप पड़ा कारोबार
मछुआरा राकेश निषाद के अनुसार, पिछले दो महीनों से निर्यात में गिरावट आनी शुरू हो गई थी, जबकि पिछले एक महीने से यह पूरी तरह बंद हो गया है (Tilapia Fish Export Crisis)। ऐसे में मछुआरों के सामने संकट खड़ा हो गया है कि वे नए बीज डालें या नहीं। वहीं अगर मछलियों को ज्यादा समय तक तालाब में रखा गया तो उनके मरने का खतरा भी बढ़ जाएगा।
अमेरिका में बढ़ी कीमत
अमेरिका अपनी जरूरत का करीब 95 प्रतिशत तिलापिया चीन, ताइवान और भारत से आयात करता है। साल 2025 की शुरुआत में चीन से आने वाले समुद्री उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाने के बाद भारत से निर्यात बढ़ा था (Tilapia Fish Export Crisis)। मौजूदा हालात में अमेरिका में इस मछली की कीमत दोगुनी से तीन गुना तक पहुंच गई है, लेकिन युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित हो गई है।


