सीजी भास्कर, 21 दिसंबर। प्रदेश में इस वर्ष टमाटर की खेती करने वाले किसानों पर मौसम की दोहरी मार पड़ी है। करीब 50 हजार एकड़ में ली जाने वाली टमाटर की फसल बेमौसम बारिश, तापमान में उतार-चढ़ाव, अत्यधिक ठंड और घने कोहरे के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है।
प्रतिकूल मौसम की वजह से फूल और फल झड़ने, सड़न और रोगों के तेजी से फैलाव ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। नतीजतन प्रदेश में टमाटर उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। टमाटर उत्पादन में गिरावट (Tomato Production Loss) ने हजारों किसानों को गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया है।
दुर्ग, धमधा, बेमेतरा, बेरला, महासमुंद, भाटापारा, अंबिकापुर, जगदलपुर, पत्थलगांव और बिलासपुर जैसे प्रमुख टमाटर उत्पादक इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। किसानों का कहना है कि लगातार नमी बने रहने से बैक्टेरियल ब्लाइट जैसी बीमारियां तेजी से फैलीं, जिससे पत्तियां सूखकर गिरती रहीं और पौधों की बढ़वार रुक गई।
इस वर्ष दीपावली के बाद 26 से 29 अक्टूबर तक लगातार हुई बारिश ने फसल को संभलने का मौका ही नहीं दिया। उत्पादन के आंकड़े भी हालात की गंभीरता दर्शाते हैं। पिछले वर्ष प्रदेश में टमाटर का कुल उत्पादन करीब 90 लाख टन था, जो इस वर्ष घटकर 55 लाख टन पर सिमट गया है। यह सीधे तौर पर टमाटर उत्पादन में गिरावट (Tomato Production Loss) का बड़ा संकेत है।
दीपावली के आसपास जल्दी फसल लेने वाले किसानों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों के अनुसार प्रति एकड़ 80 हजार से एक लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है। सामान्य परिस्थितियों में जब टमाटर का औसत उत्पादन प्रति एकड़ 100 टन होता है, तब लागत 8 से 10 रुपये प्रति किलो रहती है।
लेकिन इस वर्ष उत्पादन घटकर 50 से 60 टन रह गया, जिससे लागत बढ़कर 20 से 25 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। हालांकि वर्तमान में बाजार में टमाटर का भाव करीब 60 रुपये प्रति किलो है, लेकिन खराब गुणवत्ता के कारण किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ऐसा रहा मौसम का गणित
पिछले वर्ष दीपावली के बाद 20 दिसंबर तक कोहरा हल्का और कम अवधि का था, जबकि इस वर्ष घना और लंबे समय तक कोहरा छाया रहा। अनुमान के अनुसार पिछले साल औसतन 5 से 7 दिन ही कोहरा रहा, वह भी 2 से 3 घंटे प्रतिदिन। इसके उलट इस वर्ष करीब 12 से 15 दिन तक 4 से 6 घंटे प्रतिदिन घना कोहरा रहा।
तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जो टमाटर के लिए अनुकूल माना जाता है, लेकिन लगातार बारिश और अधिक नमी ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। अनुकूल तापमान के बावजूद बारिश और कोहरे की दोहरी मार ने टमाटर उत्पादन में गिरावट (Tomato Production Loss) को और गहरा कर दिया।
किसान तबाह, राहत पैकेज की मांग
फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष रितेश टांक के अनुसार, इस वर्ष बड़ी संख्या में टमाटर किसान भारी नुकसान से जूझ रहे हैं। कई किसान कर्ज में डूब गए हैं और उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई है। संघ ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित किसानों को तत्काल राहत पैकेज, मुआवजा और कर्ज में राहत दी जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें।





