सीजी भास्कर, 03 दिसंबर | छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में सड़क नियमों की अनदेखी, स्टंटबाजी और हाईवे पर बर्थडे सेलिब्रेशन जैसी घटनाओं ने हाईकोर्ट को गंभीर रूप से चिंतित कर दिया है। डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि Traffic Rule Violation अब सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि “रसूख का प्रदर्शन” बन गया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से शपथपत्र में स्पष्ट जवाब मांगा है कि आखिर ग्राउंड लेवल पर गाइडलाइंस क्यों लागू नहीं हो रही हैं।
“असरदार लोग कानून को हल्का समझ रहे”, कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
बेंच की ताज़ा टिप्पणी में यह बात साफ झलकी कि राज्य में जारी निर्देश सिर्फ फाइलों में सीमित हैं। कोर्ट के अनुसार, सड़क पर स्टंट करना—चाहे वह बाइक हो या कार—या फिर हाईवे पर पटाखे फोड़कर जश्न मनाना, ये सब बताता है कि कुछ लोग कानून को मजाक समझ बैठे हैं। बेंच ने दोहराया कि अगर हालात नहीं बदले, तो न्यायालय सख्त आदेश पारित करने से पीछे नहीं हटेगा।
बिलासपुर की घटना: कार की बोनट पर बैठकर दबंगई का स्टंट
कुछ ही दिन पुराने वीडियो में बिलासपुर के रिवर व्यू रोड पर एक युवक खुलेआम कार की बोनट पर बैठकर स्टंट करता दिखा। वीडियो में वह अपनी “इलाके की दबंगई” का दावा कर रहा था, जैसे सड़क उसकी निजी संपत्ति हो। वीडियो वायरल होते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की। अधिकारी ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद वाहन जब्त करने की कार्रवाई की जा चुकी है।
नेशनल हाईवे पर बर्थडे पार्टी, पटाखे… और फिर जांच
कोरिया जिले के बैकुंठपुर में हाईवे-43 पर एक ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर द्वारा रात में केक काटने और पटाखे फोड़ने का मामला सामने आया। सरकारी पद और जिम्मेदारी होने के बावजूद हाईवे को पार्टी स्पॉट बना देना न सिर्फ खतरनाक था, बल्कि Highway Misuse का सीधा उदाहरण भी—कोर्ट ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। दोनों व्यक्तियों पर बीएनएस और मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। वाहन की जब्ती की औपचारिकता भी जारी है।
कोर्ट का सवाल: “गाइडलाइन हैं, पर लागू कौन करेगा?”
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति बताती है कि ज़मीनी स्तर पर गाइडलाइंस लागू ही नहीं हो रही हैं। मुख्य सचिव के पिछले शपथपत्रों में कहा गया था कि सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं—लेकिन घटनाएं एक अलग ही कहानी बयान करती हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया कि अब Public Road Discipline की अनदेखी स्वीकार नहीं होगी।
अगली सुनवाई 4 दिसंबर को, राज्य से स्पष्ट जवाब की उम्मीद
डिवीजन बेंच ने सरकार को सख्त शब्दों में चेताया कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो न्यायालय आगे दखल देगा। अगली सुनवाई 4 दिसंबर को निर्धारित है, जहां मुख्य सचिव को हर सवाल का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब देना होगा।






