सीजी भास्कर, 31 दिसंबर। दूरस्थ पहाड़ियों, घने जंगलों और दुर्गम बसाहटों में रहने वाले आदिवासी परिवारों के लिए अब इलाज किसी चुनौती (Tribal Healthcare) से कम नहीं रहेगा। छत्तीसगढ़ में जनजातीय अंचलों की स्वास्थ्य व्यवस्था को मज़बूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत 57 मोबाइल मेडिकल यूनिटों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इन चलित चिकित्सा वाहनों के ज़रिए स्वास्थ्य सेवाएँ अब अस्पतालों से निकलकर सीधे लोगों के गाँवों तक पहुँचेंगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पहाड़ी और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए यह पहल किसी वरदान से कम नहीं है। अब सामान्य बीमारी से लेकर आवश्यक जाँच तक की सुविधा गाँव में ही उपलब्ध होगी, जिससे समय, खर्च और जोखिम—तीनों में कमी आएगी।
18 जिलों के 2100 से अधिक गाँव होंगे कवर
इन मोबाइल मेडिकल यूनिटों की तैनाती से प्रदेश के 18 जिलों के 2100 से अधिक गाँवों और बसाहटों को नियमित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा (Tribal Healthcare) जाएगा। इसका सीधा लाभ दो लाख से अधिक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) की आबादी को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की कुल आबादी में विशेष पिछड़ी जनजातियों की संख्या सीमित है, लेकिन उनकी ज़रूरतें विशेष हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था तैयार की गई है।
चलती-फिरती अस्पताल जैसी सुविधा
प्रत्येक मोबाइल मेडिकल यूनिट में डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन और स्थानीय वालंटियर तैनात रहेंगे। इन यूनिटों के माध्यम से 25 प्रकार की जाँच सुविधाएँ और 106 तरह की आवश्यक दवाइयाँ पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएँगी। इसका उद्देश्य केवल इलाज नहीं, बल्कि समय रहते बीमारी की पहचान और रोकथाम भी है।
आदिवासी स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत नींव
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पहल आदिवासी समुदायों की स्वास्थ्य सुरक्षा (Tribal Healthcare) के साथ-साथ उनकी सामाजिक भागीदारी को भी सशक्त बनाएगी। उन्होंने इस योजना को ज़मीनी स्तर पर सफल बनाने में जुटे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी इस अवसर पर कहा कि सुदूर वनांचलों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता है और यह मोबाइल मेडिकल यूनिट उसी सोच का परिणाम हैं। उन्होंने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनजातीय कल्याण के विज़न से जोड़ते हुए इसे प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।


