सीजी भास्कर, 18 जनवरी। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास ने कहा है कि अगर अमेरिका और यूरोप के NATO सहयोगी देश आपस में बंटे रहे, तो इसका सबसे अधिक फायदा चीन और रूस को मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहयोगी देशों के बीच फूट वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। मौजूदा स्थिति को उन्होंने ट्रंप टैरिफ विवाद (Trump Tariff Controversy) से जोड़कर देखा।
दरअसल, यह बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया रुख के बाद सामने आया है। ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल किया जाना चाहिए। ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क के अधीन है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देश इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं होते हैं, तो 1 फरवरी 2026 से कई NATO देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा, जो जून 2026 तक बढ़कर 25 प्रतिशत तक हो सकता है। ट्रंप का दावा है कि यह फैसला अमेरिका और वैश्विक सुरक्षा से जुड़ा है, लेकिन इससे ट्रंप टैरिफ विवाद (Trump Tariff Controversy) और तेज हो गया है।
‘रूस और चीन को हो रहा फायदा’
काजा कैलास ने कहा कि चीन और रूस इस स्थिति से बेहद खुश होंगे, क्योंकि सहयोगी देशों के बीच मतभेदों का सीधा लाभ उन्हें मिलता है। उन्होंने कहा कि अगर ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता है, तो इसे NATO के भीतर आपसी बातचीत से सुलझाया जा सकता है। टैरिफ जैसे कदम अमेरिका और यूरोप—दोनों को आर्थिक रूप से कमजोर कर सकते हैं और हमारी साझा समृद्धि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनके मुताबिक यह पूरा संकट ट्रंप टैरिफ विवाद (Trump Tariff Controversy) की वजह से और जटिल हो गया है।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका और यूरोप को अपने आपसी विवादों को रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे अहम मुद्दों से ध्यान भटकाने नहीं देना चाहिए। काजा कैलास का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में सहयोग और एकजुटता की सबसे ज्यादा जरूरत है, न कि आर्थिक दबाव और धमकियों की राजनीति की।




