सीजी भास्कर, 30 दिसंबर। भारत का यूनियन बजट केवल सरकार की आय और खर्च का अनुमान भर नहीं होता, बल्कि यह देश की करीब 140 करोड़ आबादी की उम्मीदों, आकांक्षाओं और भविष्य की दिशा तय करने वाला दस्तावेज होता है। हर वर्ग—किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग, उद्योगपति और युवा—इससे अपनी उम्मीदें जोड़कर देखता है। सरकार एक ओर आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले सुधारों का ऐलान करती है, तो दूसरी ओर कमजोर और वंचित वर्गों की जिंदगी को आसान बनाने के उपाय करती है। यही वजह है कि यूनियन बजट (Union Budget 2026) को देश की अर्थव्यवस्था की धड़कन कहा जाता है।
आमतौर पर बजट का मतलब आय और व्यय के आंकड़ों से लगाया जाता है, लेकिन जब बात भारत के यूनियन बजट की होती है तो इसके मायने कहीं ज्यादा व्यापक हो जाते हैं। रोजगार सृजन, उद्योग और व्यापार को प्रोत्साहन, टैक्स नियमों को सरल बनाना और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना ये सभी पहलू बजट का अहम हिस्सा होते हैं। सरकार की कोशिश रहती है कि यूनियन बजट (Union Budget 2026) के जरिए आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ समावेशी विकास को भी आगे बढ़ाया जाए।
हर साल महीनों पहले शुरू हो जाती है बजट की तैयारी
यूनियन बजट तैयार करने की प्रक्रिया करीब पांच महीने पहले ही शुरू हो जाती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उद्योग और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों, अर्थशास्त्रियों, किसान संगठनों, निवेशकों, टैक्सपेयर्स और आम नागरिकों से बातचीत कर उनकी अपेक्षाएं जानने की कोशिश करती हैं। वित्त मंत्रालय के अधिकारी विभिन्न मंत्रालयों से अगले वित्त वर्ष की योजनाओं और बजट आवंटन से जुड़ी जानकारी जुटाते हैं, ताकि यूनियन बजट (Union Budget 2026) ज्यादा संतुलित और व्यावहारिक बन सके।
सरकार की वित्तीय सेहत का आईना होता है बजट
विशेषज्ञों का मानना है कि यूनियन बजट सरकार के लिए अपनी वित्तीय सेहत बताने का भी सबसे बड़ा मंच होता है। हर बजट में फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य तय किया जाता है और उसे नियंत्रित रखने की कोशिश की जाती है। यूनियन बजट 2025 में सरकार ने फिस्कल डेफिसिट 4.4 प्रतिशत रखने का लक्ष्य तय किया था। फिस्कल डेफिसिट जितना कम रहता है, सरकार को बाजार से उतना ही कम उधार लेना पड़ता है। ऐसे में यूनियन बजट (Union Budget 2026) में भी वित्तीय अनुशासन पर खास जोर रहने की संभावना है।
आर्थिक गतिविधियां तेज करने पर रहेगा फोकस
पिछले कुछ वर्षों से यूनियन बजट में पूंजीगत खर्च पर सरकार का विशेष ध्यान रहा है। कैपिटल एक्सपेंडिचर का लक्ष्य लगातार 10 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रखा गया है, जिसका बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर खर्च होता है। सरकार का मानना है कि पूंजीगत खर्च बढ़ने से इकोनॉमी में आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं, मांग और उपभोग बढ़ता है और देश का आधारभूत ढांचा मजबूत होता है। यही रणनीति यूनियन बजट (Union Budget 2026) में भी जारी रहने की उम्मीद है।
जीडीपी ग्रोथ को रफ्तार देने की तैयारी
यूनियन बजट 2026 ऐसे समय आ रहा है, जब जीएसटी में बड़े सुधार लागू किए गए हैं और सैकड़ों वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है। इसके अलावा, यूनियन बजट 2025 में 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को टैक्स-फ्री करने से मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिली थी। इससे लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा आया और इकोनॉमी में डिमांड बढ़ी। खुदरा महंगाई दर रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास है और सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.2 प्रतिशत रही। इन हालात में यूनियन बजट (Union Budget 2026) का मकसद विकास की इस रफ्तार को बनाए रखना होगा।
आम आदमी को राहत देने के संकेत
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यूनियन बजट 2026 में आम आदमी की जिंदगी को आसान बनाने वाले बड़े ऐलान हो सकते हैं। रोजगार सृजन, कृषि क्षेत्र के लिए ज्यादा आवंटन, किसानों की आय बढ़ाने के उपाय और आयुष्मान भारत योजना के दायरे के विस्तार पर सरकार का फोकस रह सकता है। इसके साथ ही टैक्सपेयर्स को और राहत देने की कोशिश भी की जा सकती है। कुल मिलाकर, यह बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला दस्तावेज साबित हो सकता है।


