बिलासपुर में सराफा कारोबारी से हुई बड़ी लूट के मामले में फरार आरोपी उत्तर प्रदेश में पुलिस घेरे में आ गए। (UP Police Encounter Arrest) के दौरान संदिग्धों ने रास्ता बदलकर बच निकलने की कोशिश की, मगर घेराबंदी कसते ही उनकी योजना धरी रह गई। कार्रवाई के बीच एक आरोपी के पैर में गोली लगने के बाद पूरे गिरोह ने हथियार डाल दिए, जिससे ऑपरेशन बिना किसी बड़े नुकसान के समाप्त हुआ।
सोना-नकदी की खेप और भागने का रूट
जांच में सामने आया कि वारदात के वक्त करीब दो किलो सोना और नकदी छीनी गई थी। (Bilaspur Robbery Case) की कड़ियाँ जोड़ते हुए पुलिस ने फुटेज, कॉल-डिटेल और मूवमेंट पैटर्न का मिलान किया। आरोपियों ने पहचान छुपाने के लिए रास्ते बदले, नंबर प्लेट बदली और ठहरने की जगहें भी बदलीं—लेकिन डिजिटल ट्रेल ने आखिरकार ठिकाना बता दिया।
अंतरराज्यीय समन्वय की कसौटी
उत्तर प्रदेश और बिलासपुर की टीमों के बीच त्वरित तालमेल से ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। (Joint Police Operation) के तहत संदिग्ध वाहन को रोका गया तो आरोपियों ने भागने की कोशिश की, जवाबी कार्रवाई में हालात काबू में आ गए। घायल आरोपी को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि बाकी को हिरासत में लेकर प्राथमिक पूछताछ शुरू हुई।
वारदात में इस्तेमाल वाहन और सुराग
प्राथमिक छानबीन में सामने आया कि वारदात के लिए चोरी की बाइक और एक कार का इस्तेमाल किया गया था। (Loot Recovery Update) के तहत पहले से बरामद वाहन से मिले फॉरेंसिक सुरागों ने केस को मजबूत किया। पुलिस अब सोने की बरामदगी, ठिकानों की पहचान और सप्लाई-चेन के लिंक खंगालने में जुटी है, ताकि नेटवर्क की पूरी परत खुल सके।
प्रोडक्शन वारंट पर वापसी की तैयारी
कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा, फिर प्रोडक्शन वारंट पर बिलासपुर लाने की तैयारी है। (UP Police Encounter Arrest) के बाद पूछताछ का फोकस लूट के माल की रिकवरी, सहयोगियों की पहचान और वारदात से पहले की रेकी पर रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के पुख्ता होते ही मामले में विस्तृत खुलासा किया जाएगा।






