रायपुर के उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल के बाहर सोमवार को उस वक्त तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में भारी लापरवाही और अवैध वसूली के आरोप लगाए। प्रदर्शन में सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। परिजनों का कहना है कि Urmila Memorial Hospital case सिर्फ एक मेडिकल लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों को उजागर करता है।
Urmila Memorial Hospital case में ऑपरेशन पर सवाल, तीन सर्जरी के बाद भी नहीं बची जान
मृतक राम चरण वर्मा के बेटे राजकुमार वर्मा ने बताया कि उनके पिता पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार, डॉक्टरों ने एक के बाद एक तीन ऑपरेशन किए। पहले ऑपरेशन के बाद “अंदर लीकेज” की बात कही गई, फिर दोबारा सर्जरी हुई, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी। बाद में गले से जुड़ी सर्जरी भी की गई। परिजनों का आरोप है कि Urmila Memorial Hospital case में इलाज की दिशा बार-बार बदली गई, जिससे मरीज की हालत बिगड़ती चली गई।
परिवार का दावा है कि इलाज के दौरान आयुष्मान कार्ड से 2.71 लाख रुपये की राशि ली गई, जबकि मेडिकल स्टोर के बिल 15 लाख रुपये से अधिक बताए जा रहे हैं। टेस्ट, ब्लड और अन्य जांच के नाम पर करीब 3 लाख रुपये अलग से वसूले गए। इसके अलावा, ऑपरेशन के नाम पर 5 लाख रुपये से ज्यादा नकद लेने और आगे भी रकम मांगने का आरोप लगाया गया। परिजनों के मुताबिक, Urmila Memorial Hospital case में गरीब मरीज के इलाज को कमाई का जरिया बना दिया गया।
Urmila Memorial Hospital case को लेकर प्रशासन से शिकायत, अब तक कार्रवाई पर सवाल
राजकुमार वर्मा का कहना है कि उन्होंने इलाज के दौरान ही सरकारी अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन हर बार सिर्फ जांच की बात कही गई। परिवार का आरोप है कि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, जिससे स्थिति हाथ से निकल गई। प्रशासन की ओर से जांच शुरू होने की बात कही गई है, लेकिन Urmila Memorial Hospital case में परिजन ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच बातचीत हुई, लेकिन मुआवजे को लेकर सहमति नहीं बन पाई। परिजनों ने अस्पताल की मान्यता रद्द करने और तत्काल सील करने की मांग रखी। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। Urmila Memorial Hospital case ने शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
Urmila Memorial Hospital case ने उजागर की इलाज व्यवस्था की सच्चाई
परिजनों ने बताया कि इलाज के खर्च के लिए उन्हें गोल्ड लोन लेना पड़ा, रिश्तेदारों और समूहों से कर्ज लेना पड़ा। उनका आरोप है कि “जितना बोला गया, उतना दिया गया”, फिर भी इलाज नहीं मिला। इस पूरे घटनाक्रम ने आम मरीजों की सुरक्षा और निजी अस्पतालों की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। Urmila Memorial Hospital case को लेकर स्थानीय लोगों में भी गुस्सा देखा जा रहा है।






