अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग को ज़मीनी स्तर पर परखते हुए हाल ही में दोनों सेनाओं ने एक संयुक्त सैन्य अभ्यास पूरा किया। इस अभ्यास में पाकिस्तानी जवानों ने आधुनिक जमीनी ऑपरेशन, मिशन प्लानिंग और आतंकवाद-रोधी रणनीतियों पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। जानकारों के अनुसार, (US Pakistan military drill) दोनों देशों के रक्षा संवाद को नए सिरे से सक्रिय करने का संकेत देता है।
पब्बी में हुआ अभ्यास, दो हफ्ते चला प्रशिक्षण
यह संयुक्त अभ्यास पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा स्थित पब्बी में नेशनल काउंटर-टेररिज्म सेंटर के परिसर में आयोजित किया गया। “इंस्पायर्ड गैम्बिट 2026” नाम से हुए इस अभ्यास में करीब दो सप्ताह तक सैनिकों ने साझा ड्रिल, सिमुलेशन और फील्ड मूवमेंट में भाग लिया। अधिकारियों के मुताबिक, (US Pakistan military drill) को रियल-टाइम ऑपरेशनल परिस्थितियों के अनुरूप डिजाइन किया गया था।
आतंकवाद-रोधी अभियानों पर खास जोर
संयुक्त ट्रेनिंग के दौरान शहरी और अर्ध-पर्वतीय इलाकों में ऑपरेशन, सर्च-एंड-क्लियर मिशन, इंटेलिजेंस-आधारित कार्रवाई और यूनिट-लेवल कोऑर्डिनेशन पर अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि (US Pakistan military drill) का मुख्य उद्देश्य बदलते सुरक्षा खतरों के बीच त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना रहा।
कूटनीति के साथ रक्षा संतुलन की कोशिश
हाल के महीनों में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने रिश्तों को पुनर्संतुलित करने की दिशा में सक्रिय दिख रहा है। अमेरिका और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ संवाद बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि (US Pakistan military drill) इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ी हलचल
अमेरिका-पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य तालमेल पर क्षेत्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भारत में इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई हैं, जहां कुछ दलों ने इसे विदेश नीति से जोड़कर देखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि (US Pakistan military drill) दक्षिण एशियाई सुरक्षा समीकरणों पर असर डाल सकता है।
भविष्य के सहयोग का संकेत
कुल मिलाकर यह अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच इंटर-ऑपरेबिलिटी और भरोसे को मजबूत करने की कवायद के रूप में सामने आया है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, (US Pakistan military drill) आने वाले समय में और संयुक्त प्रशिक्षण या तकनीकी सहयोग का आधार बन सकता है।




