सीजी भास्कर 14 दिसम्बर Uttarakhand Ropeway Projects : उत्तराखंड में पहाड़ों के बीच आवाजाही को आसान और सुरक्षित बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा खाका तैयार किया है। प्रदेश में पर्यटन और तीर्थाटन को नई रफ्तार देने के लिए कुल 50 रोपवे परियोजनाओं का प्रस्ताव सामने आया है, जिनमें से 6 को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
केदारनाथ और हेमकुंड साहिब पर सबसे पहले फोकस
प्राथमिक परियोजनाओं में सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविंद घाट से हेमकुंड साहिब तक बनने वाले रोपवे शामिल हैं। इन दोनों प्रोजेक्ट्स का कार्य आवंटन हो चुका है और अब इन्हें जमीनी स्तर पर तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है, ताकि श्रद्धालुओं को दुर्गम पैदल मार्ग से राहत मिल सके।
काठगोदाम से नैनीताल तक नई कनेक्टिविटी की तैयारी
काठगोदाम से हनुमानगढ़ी मंदिर होते हुए नैनीताल तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना फिलहाल अनुमोदन प्रक्रिया में है। इस परियोजना को भविष्य की पर्यटन जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे झील नगरी की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग मिल सके।
संचालन समिति की बैठक में तय हुआ रोडमैप
रोपवे विकास से जुड़े फैसलों को लेकर संचालन समिति की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्पष्ट किया गया कि राज्य में बनने वाले सभी रोपवे प्रोजेक्ट्स को समिति की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इसका मकसद अलग-अलग एजेंसियों के बीच दोहराव से बचना और संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।
आने वाले 5–10 साल को ध्यान में रखकर प्लानिंग
बैठक में यह भी कहा गया कि बड़े रोपवे प्रोजेक्ट्स पूरे होने के बाद अगले 5 से 10 वर्षों में उभरने वाले नए पर्यटन स्थलों और मार्गों को ध्यान में रखकर अभी से विस्तृत योजना तैयार की जाए, ताकि भविष्य में विस्तार आसान हो सके।
डीपीआर और टेंडर प्रक्रिया पर काम तेज (Uttarakhand Ropeway Projects)
प्रदेश की प्रस्तावित परियोजनाओं में कनकचौरी से कार्तिक स्वामी तक रोपवे की डीपीआर तैयार की जा रही है। वहीं रैथल-बारसू से बरनाला (उत्तरकाशी) और जोशीमठ-औली-गौरसों रोपवे के लिए डीपीआर तैयार करने की निविदा प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है।
6 प्राथमिक परियोजनाओं के लिए तय होंगी टाइमलाइन
निर्देश दिए गए हैं कि चयनित 6 प्राथमिक परियोजनाओं पर विशेष फोकस रखा जाए। सोनप्रयाग-केदारनाथ और गोविंद घाट-हेमकुंड साहिब रोपवे की हर स्टेज के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने के साथ-साथ वन और वन्यजीव से जुड़ी स्वीकृतियों को भी तेजी से निपटाने पर जोर दिया गया है।
सड़क, पुल और मशीनरी तक पहुंच पर भी ध्यान
रोपवे निर्माण के लिए भारी मशीनरी को साइट तक पहुंचाने हेतु सड़कों के टर्निंग रेडियस बढ़ाने और पुलों के मजबूतीकरण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि निर्माण कार्य के दौरान किसी तरह की तकनीकी बाधा न आए।
कैंची धाम को जोड़ने पर गंभीर विचार
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए काठगोदाम-हनुमानगढ़ी रोपवे परियोजना में कैंची धाम को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसे आध्यात्मिक पर्यटन से जोड़कर एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।






