सीजी भास्कर 1 जनवरी Vaibhav Suryavanshi Double Century Dream : पिछला साल वैभव सूर्यवंशी के नाम रहा। जहां-जहां बल्ला चला, रिकॉर्ड बने। आईपीएल में शतक, विदेशी पिचों पर आत्मविश्वास से भरी पारियां और उम्र से पहले बड़ी पहचान—सब कुछ मिला। इसके बावजूद वैभव के भीतर एक हल्की-सी टीस रह गई, एक ऐसा सपना जो पूरा होते-होते रह गया।
गुरु के दिल में भी वही अधूरा अरमान
वैभव की यह कसक सिर्फ उनकी नहीं है, बल्कि उनके बचपन के कोच मनीष ओझा का सपना भी है। कोच मानते हैं कि वैभव ने पिछले साल खुद को हर स्तर पर साबित किया, लेकिन एक दोहरा शतक उनसे बस एक कदम दूर रह गया।
दो बार करीब आकर टूटा सपना
पिछले सीजन में दो मौके ऐसे आए, जब इतिहास बस एक शॉट दूर था। अंडर-19 एशिया कप में 177 रन पर पारी थम गई, वहीं विजय हजारे ट्रॉफी में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 190 रन पर आउट होना पड़ा। दोनों बार वैभव ने मैच पर पूरा नियंत्रण रखा, लेकिन दोहरे शतक की कहानी अधूरी रह गई।
2026 से जुड़ी उम्मीदें और नई शुरुआत
नया साल वैभव सूर्यवंशी के लिए नई उम्मीदें लेकर आया है। कोच मनीष ओझा को भरोसा है कि 2026 वही साल होगा, जब यह अधूरा सपना पूरा होगा। उनका मानना है कि वैभव अब मानसिक और तकनीकी रूप से उस मुकाम के लिए तैयार हैं।
साउथ अफ्रीका दौरे पर नजरें
भारतीय अंडर-19 टीम का साउथ अफ्रीका दौरा 3 जनवरी से शुरू हो रहा है, जहां वैभव सूर्यवंशी कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। तेज और उछाल भरी पिचों पर वैभव से बड़ी पारी की उम्मीद की जा रही है। कोच को विश्वास है कि यही दौरा दोहरे शतक के सपने को हकीकत में बदल सकता है।
कप्तानी के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, कप्तान के तौर पर भी वैभव पर सबकी नजरें होंगी। टीम को संभालना, दबाव में फैसले लेना और खुद उदाहरण बनना—ये सब 2026 में उनके क्रिकेट सफर को और परिपक्व बना सकता है।
गुरु को है भरोसा, शिष्य करेगा कमाल
कोच मनीष ओझा कहते हैं कि अगर वैभव को एक लंबी पारी खेलने का मौका मिला, तो दोहरा शतक दूर नहीं है। उनका मानना है कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास—तीनों अब वैभव के खेल में साफ झलकते हैं। 2026 शायद उस सपने का साल हो, जो अब तक अधूरा था।





