सीजी भास्कर, 17 दिसंबर। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष (Vande Mataram 150 Years) पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरवशाली परंपरा हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। वंदे मातरम् की यही चेतना आज भी राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करती है ।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में वंदे मातरम् का उद्घोष सुनते ही अंग्रेजी हुकूमत तक कांप उठती थी। यह वह स्वर था, जिसने करोड़ों भारतीयों के मन में साहस, त्याग और बलिदान की ज्वाला प्रज्वलित की। इसी गीत ने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति दी।
उन्होंने अमर बलिदानियों को नमन करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होना (Vande Mataram 150 Years) केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक है। यह गीत हमें उस संघर्ष और पीड़ा की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्र राष्ट्र बनाया।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों से होती है। भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत विश्व में अद्वितीय है और वंदे मातरम् उसी विरासत की सशक्त अभिव्यक्ति है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विधानसभा में इस विशेष चर्चा का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ना है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के आदर्शों को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। अंत में मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष और सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन राष्ट्र की आत्मा को मजबूत करने का कार्य करते हैं और देशभक्ति की भावना को नई ऊर्जा देते हैं।


