सीजी भास्कर, 28 नवंबर | मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर क्षेत्र के भरतपुर-सोनहत विधानसभा में पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने SIR (Special Integrated Revision) के दौरान हुई एक बड़ी चूक को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखित शिकायत भेजी है। कमरो का कहना है कि उनका SIR फॉर्म ऑनलाइन प्रोसेस ही नहीं हो रहा था, और जांच करने पर सामने आया कि उनका नाम रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ में दर्ज हो गया है—जो कि एक गंभीर “Voter List Error” की ओर इशारा करता है।
फॉर्म जमा करने के बाद भी नाम गलत जिले में दर्ज
पूर्व विधायक ने बताया कि उन्होंने प्रक्रिया की शुरुआत में ही अपना फॉर्म स्थानीय BLO को सौंप दिया था। इसके बावजूद उनका नाम दूसरे जिले की मतदाता सूची में चला जाना प्रशासनिक सतर्कता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने यह भी पूछा कि रायगढ़ जिले के BLO तक उनके और उनके माता-पिता के EPIC नंबर आखिर पहुंचे कैसे, जबकि दस्तावेज़ उन्होंने केवल अपने गांव के अधिकारी को सौंपे थे।
Voter List Error : जांच और कार्रवाई की मांग तेज
कमरो ने मामले की विस्तृत जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान और उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी आम नागरिक के साथ यह घटना होती तो शायद वह आवाज़ भी नहीं उठा पाता। SIR प्रक्रिया को लेकर इस तरह की चूक आने वाले चुनावों में मतदाताओं के भरोसे को प्रभावित कर सकती है।
विपक्ष ने भी मुद्दा उठाया, प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
इस मामले को लेकर विपक्ष ने भी चिंता जताई है। प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने हाल ही में एक प्रेसवार्ता में कहा कि जब तीन बार चुनाव लड़ चुके जनप्रतिनिधि का नाम ही उनके क्षेत्र की मतदाता सूची से हटकर किसी दूसरे जिले में चला जा रहा है, तो आम मतदाता की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। महंत ने इसे सिर्फ तकनीकी चूक नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा हमला बताया।
“बार-बार फॉर्म भरवा रहे हैं, नाम फिर भी कट रहे”—महंत
महंत का कहना था कि SIR के नाम पर लोगों को कई बार फॉर्म जमा कराना पड़ रहा है, फिर भी मतदाता सूची में नाम कटने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति मतदाताओं के लिए परेशानी बढ़ाने वाली है और इसे नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
मतदाता सूची की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण ने मतदाता सूची की सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब, जब एक पूर्व विधायक जैसा व्यक्ति भी अपने नाम की पुष्टि नहीं कर पा रहा है। चुनावी वर्ष के पहले सामने आया यह विवाद प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है और चुनाव आयोग से कड़े कदमों की अपेक्षा बढ़ा दी है।





