Water Crisis Chhattisgarh : प्रदेश में मार्च की शुरुआत के साथ ही तापमान बढ़ने लगा है और इसके साथ कई इलाकों में जल संकट के संकेत भी सामने आने लगे हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में बोरवेल का जलस्तर नीचे जाने लगा है, वहीं राजधानी समेत कुछ शहरी इलाकों में भी पानी की किल्लत की शिकायतें आने लगी हैं। यह स्थिति तब सामने आई है जब पिछले करीब सात वर्षों में पेयजल आपूर्ति की विभिन्न योजनाओं पर लगभग 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
भूजल संकट से निपटने के लिए नई योजना
ग्रामीण इलाकों में भूजल की कमी और दूषित पानी की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने मल्टी विलेज स्कीम शुरू की है। इस योजना के तहत लगभग 4527 करोड़ रुपये की लागत से 18 जिलों में 71 परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इन परियोजनाओं के जरिए तीन हजार से अधिक गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है।
ओवरहेड टैंक और ट्रीटमेंट प्लांट से व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश
पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश के कई गांवों और शहरों में हजारों ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। इसके अलावा नालों के गंदे पानी को साफ करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किए गए हैं। इन प्लांट्स के जरिए उपचारित पानी का उपयोग उद्योगों और अन्य कार्यों में किया जा सकेगा, ताकि पीने योग्य पानी का उपयोग केवल आवश्यक जरूरतों के लिए किया जा सके।
कई परियोजनाएं अधूरी, इसलिए बनी हुई है समस्या
हालांकि इन योजनाओं पर भारी खर्च के बावजूद कई स्थानों पर जल संकट पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। जांच में सामने आया है कि कई परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद काम अधूरे पड़े हैं। इसी कारण कई इलाकों में नई जल संरचनाएं बनने के बाद भी उनका पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
रायपुर के कुछ इलाकों में टंकियां बनीं, पाइपलाइन से नहीं जुड़ीं
राजधानी रायपुर के लाभांडी और फुंडहर जैसे क्षेत्रों में वर्षों पहले ओवरहेड टंकियां बन चुकी हैं, लेकिन उन्हें मुख्य राइजिंग पाइपलाइन से अब तक नहीं जोड़ा जा सका है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पाइपलाइन विस्तार के लिए समय पर बजट और तकनीकी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण कई परियोजनाएं बीच में ही अटक गईं।
अमृत मिशन से शहरों में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट
शहरी इलाकों में पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अमृत मिशन के तहत तीन से चार हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, कोरबा और अंबिकापुर जैसे शहरों में नई पाइपलाइन, जलाशय और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए हैं। राजधानी रायपुर में खारुन नदी के किनारे करीब 200 एमएलडी क्षमता के तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किए गए हैं।
एक स्रोत से कई गांवों तक पहुंचेगा साफ पानी
मल्टी विलेज स्कीम का उद्देश्य एक बड़े जल स्रोत या जल शोधन संयंत्र से पाइपलाइन के माध्यम से कई गांवों तक एक साथ शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। इस व्यवस्था से छोटे गांवों के लिए अलग-अलग जल परियोजनाएं बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और साफ पानी की आपूर्ति अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।





