सीजी भास्कर, 10 सितंबर। पूरे छत्तीसगढ़ में अगले पांच दिनों तक लगातार बारिश(Weather Alert) की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने बुधवार को कोरबा, सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़, बीजापुर, दंतेवाड़ा और बस्तर—इन 8 जिलों में तेज बारिश का (Yellow Alert) जारी किया है। वहीं अन्य जिलों में गरज-चमक के साथ (Lightning Strike) की घटनाएं हो सकती हैं और कई जगहों पर तेज आंधी चलने की चेतावनी दी गई है।
पिछले 24 घंटे में सरगुजा संभाग के कुछ इलाकों में भारी बारिश(Weather Alert) दर्ज की गई, जबकि अन्य क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हुई। मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल 8 सितंबर तक प्रदेश में मानसून का 86.9% कोटा पूरा हो चुका है। सामान्य तौर पर औसत 1143.3 मिमी बारिश होती है, जबकि अब तक 994 मिमी वर्षा हो चुकी है। अगस्त महीने को छोड़ दें तो इस बार मानसून ने लगभग सामान्य प्रदर्शन किया है।
बलरामपुर में सबसे ज्यादा पानी बरसा
अब तक 994 मिमी बारिश दर्ज हुई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 472 मिमी पानी बरसा, जो सामान्य से 49% कम है। दूसरी ओर, बलरामपुर जिले में 1344.5 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से 54% अधिक है। वहीं बस्तर और जगदलपुर जैसे जिलों में बारिश सामान्य के आसपास रही। ये आंकड़े 1 जून से 9 सितंबर 2025 तक के हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दिक्कतें जारी
पिछले हफ्ते दक्षिण और उत्तरी छत्तीसगढ़ में हुई भारी बारिश(Weather Alert) से बस्तर संभाग के चार जिलों में तबाही मच गई। कई छोटे पुल बह गए, 200 से ज्यादा घर ढह गए और नदियां-नाले उफान पर आ गए। प्रशासन को तत्काल राहत और बचाव अभियान चलाना पड़ा। हजारों लोगों को अस्थायी (Relief Camps) में शिफ्ट किया गया। स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में अब भी दिक्कतें बनी हुई हैं।
बलरामपुर में बांध फूटा, 6 की मौत
लगातार बारिश ने बलरामपुर जिले में भीषण त्रासदी ला दी। बांध फूटने से निचले इलाकों के कई मकान बह गए। अब तक 6 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 1 बच्ची की तलाश जारी है। अचानक आई इस आपदा से लोगों में दहशत फैल गई है।
बस्तर में ढहे 200 मकान, हाईवे टूटा
बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों में भारी बारिश से 200 से ज्यादा घर जमींदोज हो गए। 2196 लोग राहत शिविरों में ठहरे हैं। अब तक 5 मौतें हो चुकी हैं। बारसूर में स्टेट हाईवे-5 का पुल टूट गया, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क कट गया है। ग्रामीण अब सीढ़ी बांधकर नदी पार करने को मजबूर हैं।
कैसे गिरती है आकाशीय बिजली
विशेषज्ञों का कहना है कि आसमान में बादलों के टकराव से घर्षण पैदा होता है और उससे बिजली बनती है। यह बिजली जमीन तक पहुंचकर अपने गुजरने का रास्ता ढूंढती है। यदि यह बिजली के खंभों से टकराती है तो वह कंडक्टर का काम करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से अगर कोई इंसान इसकी चपेट में आ जाए तो वही सबसे बड़ा कंडक्टर बन जाता है और उसकी जान खतरे में पड़ जाती है।


