सीजी भास्कर, 09 जनवरी। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चलाई जा रही बिहान योजना अब ज़मीन पर ठोस बदलाव का उदाहरण (Women Self Help Group) बनती जा रही है। महासमुंद जिले के खल्लारी क्षेत्र में महिला स्वसहायता समूहों द्वारा संचालित आजीविका दुकान न सिर्फ रोज़गार का जरिया बनी है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता की नई पहचान भी गढ़ रही है।
खल्लारी के भीमखोज क्षेत्र में तिरंगा ग्राम संगठन से जुड़ी महिलाओं ने ओम सत्य साईं स्वसहायता समूह के माध्यम से इस दुकान की शुरुआत की। समूह की अध्यक्ष संतोषी सिंह के साथ वंदना यादव और माला यादव जैसी सदस्य महिलाएं इस पहल को आगे बढ़ा रही हैं। उनका उद्देश्य केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को बाज़ार से सीधे जोड़ना भी है।
स्थानीय उत्पादों का केंद्र बनी दुकान
इस आजीविका दुकान में सिलाई से तैयार परिधान, बच्चों के खिलौने, साबुन, सूपा, सारी फिनाइल, मिट्टी के बर्तन और हस्तशिल्प से जुड़े कई उत्पाद (Women Self Help Group) उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि यहां बिकने वाला हर सामान स्वयं महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार किया गया है। इससे महिलाओं को बिचौलियों से मुक्ति मिली है और उनके श्रम का पूरा लाभ सीधे उन्हें मिल रहा है।
महिलाओं ने बताया कि इस दुकान में केवल एक समूह ही नहीं, बल्कि जिले के अन्य स्वसहायता समूहों के उत्पाद भी मंगाकर बिक्री की जाती है, जिससे सामूहिक आय और आपसी सहयोग दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।
बिहान योजना से खुल रहे नए अवसर
बिहान योजना, जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित है, ग्रामीण महिलाओं को स्वरोज़गार और स्थायी आमदनी के अवसर प्रदान करती है। इस तरह की आजीविका दुकानों से न केवल परिवारों की आय बढ़ रही है, बल्कि गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत हो रही है।
महिलाओं की आवाज़
समूह की अध्यक्ष संतोषी सिंह का कहना है कि यह दुकान हमारे लिए केवल व्यापार नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इससे हमें अपने पैरों पर खड़े होने का हौसला मिला है और अब हम दूसरी महिलाओं को भी इस योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
प्रशासनिक सहयोग
हाल ही में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार द्वारा इस आजीविका दुकान का शुभारंभ (Women Self Help Group) किया गया, जिससे महिलाओं का उत्साह और बढ़ा है। प्रशासनिक सहयोग से इस पहल को आगे और विस्तार देने की संभावनाएं भी खुली हैं।


