नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल से निकलकर देशभर में पहचान बना चुकी Yogita Mandavi Judo Champion योगिता मंडावी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया। सम्मान के बाद जब योगिता छत्तीसगढ़ लौटीं, तो उनकी आंखों में आत्मविश्वास और चेहरे पर सुकून साफ नजर आया।
Early Life Struggle of Yogita: बचपन ने सिखाया मजबूत बनना
योगिता की जिंदगी की शुरुआत आसान नहीं रही। (Early Life Struggle of Yogita) बहुत कम उम्र में माता-पिता को खोने के बाद वह नानी के सहारे रहीं और फिर बालिका गृह तक का सफर तय करना पड़ा। शुरुआती दिनों में वह बेहद शांत और डरी हुई रहती थीं, लेकिन हालात ने धीरे-धीरे उन्हें अंदर से मजबूत बनाना शुरू किया।
Judo Training Journey ने बदली दिशा
बालिका गृह में अलग-अलग गतिविधियों के बीच योगिता का झुकाव जूडो की ओर हुआ। (Judo Training Journey) ने उन्हें आत्मविश्वास दिया, अनुशासन सिखाया और खुद पर भरोसा करना सिखाया। पहली ही राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीतने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार बेहतर प्रदर्शन करती रहीं।
National Level Performance से बनी पहचान
बीते तीन वर्षों में योगिता सात राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। (National Level Performance) के दौरान उन्होंने खेलो इंडिया जैसे बड़े मंच पर भी पदक जीतकर खुद को साबित किया। कोच और प्रशिक्षकों के अनुसार, योगिता की सबसे बड़ी ताकत उसका फोकस और मानसिक संतुलन है।
Weight Management Challenge बना सबसे कठिन इम्तिहान
योगिता बताती हैं कि जूडो में वजन नियंत्रित रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। कई बार मुकाबले से पहले भूखे रहना पड़ा, शरीर कमजोर लगा, लेकिन मैट पर उतरते ही हर डर पीछे छूट गया। उनका मानना है कि खेल सिर्फ ताकत का नहीं, धैर्य और मानसिक मजबूती का भी इम्तिहान होता है।
Discipline Routine से बनी रोज़ की पहचान
आज योगिता की दिनचर्या बेहद सख्त है। सुबह रनिंग, जिम और जूडो अभ्यास, फिर पढ़ाई और शाम को दोबारा ट्रेनिंग। (Athlete Discipline Routine) के बिना सफलता संभव नहीं—यह बात योगिता अपने हर दिन से साबित कर रही हैं।
Presidential Award Moment बना यादगार
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात योगिता के जीवन का अविस्मरणीय पल रहा। राष्ट्रपति की सराहना और प्रधानमंत्री की प्रेरक बातें उन्हें आगे और बेहतर करने की ताकत देती हैं। यह सम्मान उनके लिए सिर्फ ट्रॉफी नहीं, बल्कि उनके संघर्ष की पहचान है।
मैट से प्रशासन तक
योगिता का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना है। साथ ही वह पढ़ाई पूरी कर कलेक्टर बनना चाहती हैं। अपने जैसे हालात से गुजर रहे बच्चों के लिए उनका संदेश साफ है—मेहनत, अनुशासन और खुद पर विश्वास कभी बेकार नहीं जाता।


