सीजी भास्कर, 29 अगस्त। छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में साय सरकार ने तीन नए मंत्रियों को शामिल कर कैबिनेट का विस्तार किया। इसके बाद मंत्रियों की कुल संख्या बढ़कर 14 हो गई।
इस नियुक्ति पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं और अब सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
15% सीमा का विवाद
संविधान के मुताबिक किसी भी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल सीटों के 15% से अधिक नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं। इस आधार पर अधिकतम मंत्री 13 ही हो सकते हैं।
लेकिन, 20 अगस्त को हुए नए शपथ ग्रहण के बाद कैबिनेट की संख्या 14 हो गई। कांग्रेस का कहना है कि यह संविधान का उल्लंघन है।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बसदेव चक्रवर्ती ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है।
उनका कहना है कि यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 164 (1क) के खिलाफ है। अब इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है।
भाजपा का तर्क
भाजपा इस पूरे विवाद को अलग नजरिए से देख रही है। पार्टी का कहना है कि कैबिनेट विस्तार हरियाणा फॉर्मूले के अनुसार किया गया है और इसमें किसी तरह का उल्लंघन नहीं हुआ।
आगे क्या होगा?
राज्य की सियासत अब अदालत पर टिकी हुई है। अगर हाई कोर्ट कांग्रेस के तर्क को सही मानता है तो कैबिनेट की संरचना बदलनी पड़ सकती है। वहीं, अगर भाजपा का पक्ष मजबूत रहा तो 14 मंत्री बरकरार रहेंगे।