सीजी भास्कर 19 अप्रैल
रायपुर। धरसींवा विधानसभा अंतर्गत ग्राम सेरिखेड़ी में वर्षों से निवासरत आदिवासी परिवारों को बिना किसी पूर्व सूचना, बिना पुनर्वास और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के जबरन बेदखल किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में आक्रोश का माहौल है। कांग्रेस ने इस मामले पर कहा है कि यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि गरीब, मेहनतकश और मूलनिवासी आदिवासी समाज के अधिकारों पर सीधा हमला है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी(ओबीसी विभाग) के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भावेश बघेल ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भाजपा सरकार का यह निर्णय न केवल अमानवीय है, बल्कि यह आदिवासी विरोधी सोच और गरीब विरोधी नीति का जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने सालों तक उस भूमि पर रहकर अपना जीवन बसाया, अपने बच्चों का भविष्य बनाया, आज उन्हें एक झटके में सड़क पर ला खड़ा कर दिया गया।भावेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद अगर आदिवासी समाज ही सुरक्षित नहीं है, तो यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।
सरकार के संरक्षण में इस प्रकार की कार्रवाई यह दर्शाती है कि सत्ता में बैठे लोगों को गरीबों की पीड़ा और संघर्ष से कोई सरोकार नहीं है।उन्होंने आगे कहा कि घर छीन लेना सिर्फ जमीन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह किसी व्यक्ति के सम्मान, उसकी सुरक्षा और उसके पूरे जीवन से जुड़ा हुआ प्रश्न है। छोटे-छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को बिना छत के छोड़ देना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।इस संबंध में जिलाध्यक्ष रायपुर ग्रामीण पप्पू बंजारे ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सेरिखेड़ी में आदिवासी परिवारों के साथ हुआ यह व्यवहार पूरी तरह अन्यायपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि सरकार को गरीबों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, न कि उन्हें बेघर करने का काम करना चाहिए। यदि प्रशासन ने शीघ्र ही इस मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी।


