सीजी भास्कर, 20 अप्रैल : बस्तर संभाग का वह हिस्सा जो कभी माओवाद के साये में अपनी पहचान खो रहा था, आज विकास और शांति की नई इबारत लिख रहा है। कोण्डागांव जिले का पुसपाल क्षेत्र अब खौफ के साये से बाहर निकलकर पर्यटकों के स्वागत के लिए सज रहा है। शासन की सक्रियता और स्थानीय सहयोग से अब यहाँ ईको-टूरिज्म विकास (Eco-Tourism Development) के नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा हाल ही में किए गए करोड़ों के विकास कार्यों के भूमिपूजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छत्तीसगढ़ सरकार अब बस्तर के भीतरी इलाकों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए संकल्पित है।
रिसॉर्ट और ओपन रेस्टोरेंट
ग्राम परौदा में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान वन मंत्री केदार कश्यप ने क्षेत्र के कायाकल्प की योजना साझा की। उन्होंने लगभग एक करोड़ 45 लाख 96 हजार रूपए की लागत से बनने वाले आधुनिक ईको-टूरिज्म रिसॉर्ट का भूमिपूजन किया। यह रिसॉर्ट केवल एक इमारत नहीं, बल्कि क्षेत्र में होने वाले ईको-टूरिज्म विकास (Eco-Tourism Development) का एक प्रमुख केंद्र बनेगा। इसके साथ ही, पर्यटकों के खान-पान और मनोरंजन के लिए पुसपाल क्षेत्र में ही नदी के सुरम्य तट पर एक करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से एक भव्य ओपन रेस्टोरेंट के निर्माण की आधारशिला भी रखी गई।
पर्यटन सर्किट का विस्तार
मंत्री श्री कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर आने वाले पर्यटक अब तक केवल टाटामारी और चित्रकोट तक ही सीमित रहते थे। लेकिन अब कोण्डागांव–बस्तर ईको-टूरिज्म सर्किट को विस्तार दिया जा रहा है। इस सर्किट में पुसपाल को शामिल करना इस पूरे क्षेत्र के ईको-टूरिज्म विकास (Eco-Tourism Development) की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक साबित होगा।
पुसपाल की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक सुंदरता इसे पर्यटन के लिए एक अनूठा केंद्र बनाती है। यहाँ की भंवरडीह नदी में अब रोमांच के शौकीनों के लिए निम्नलिखित गतिविधियां शुरू की जाएंगी:
एटीवी राइड (ATV Ride) : ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर रोमांच का अनुभव।
एडवेंचर स्पोर्ट्स : युवाओं को आकर्षित करने के लिए विभिन्न खेल।
रिवर राफ्टिंग और बांस राफ्टिंग : स्थानीय संसाधनों के उपयोग से जल क्रीड़ा का आनंद।
सितारों के नीचे विश्राम
पुसपाल वैली का नजारा किसी जन्नत से कम नहीं है। सरकार की योजना है कि यहाँ एक भव्य व्यू पॉइंट विकसित किया जाए, जहाँ से पर्यटक सूर्यास्त का अद्भुत नजारा देख सकें। इसके अलावा, यहां बनने वाले ईको-कॉटेज पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाएंगे। मंत्री जी ने बताया कि पर्यटकों को रात्रि में सितारों से भरे साफ आसमान का आनंद लेते हुए विश्राम करने की सुविधा मिलेगी, जो आधुनिक ईको-टूरिज्म विकास (Eco-Tourism Development) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
आजीविका और स्थानीय सशक्तिकरण
पर्यटन केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों के आर्थिक उत्थान का मार्ग भी है। इस व्यापक ईको-टूरिज्म विकास (Eco-Tourism Development) से पुसपाल और आसपास के दर्जनों गांवों के युवाओं को गाइड, कुक, और रिसॉर्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सीधा रोजगार मिलेगा। क्षेत्र की समृद्ध हस्तशिल्प और बस्तरिया खान-पान को भी देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी। जब स्थानीय लोग आर्थिक रूप से सशक्त होंगे, तो शांति व्यवस्था और मजबूत होगी।
तेंदूपत्ता संग्राहकों का सम्मान और वन सुरक्षा
कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री कश्यप ने केवल पर्यटन पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि उन्होंने क्षेत्र की पारंपरिक आजीविका यानी ‘हरे सोने’ पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित तेंदूपत्ता संग्राहकों को नए संग्रहण कार्ड वितरित किए गए। उन्होंने संग्राहकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे उच्च गुणवत्ता वाले पत्तों का संग्रहण करें ताकि उन्हें न केवल बेहतर समर्थन मूल्य मिले, बल्कि भविष्य में बोनस का लाभ भी प्राप्त हो। यह प्रयास भी संपूर्ण ईको-टूरिज्म विकास (Eco-Tourism Development) की सोच का हिस्सा है, जहाँ प्रकृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था एक-दूसरे के पूरक बनते हैं।
वनों के संरक्षण की अपील
किसी भी ईको-टूरिज्म विकास (Eco-Tourism Development) की सफलता वनों के स्वास्थ्य और उनकी हरियाली पर टिकी होती है। वन विभाग ने इस अवसर पर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से मार्मिक अपील की। उन्होंने वनों को आग (दावानल) से बचाने, अवैध कटाई और अतिक्रमण रोकने में सक्रिय सहयोग माँगा। यह संदेश स्पष्ट था कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे, तभी पर्यटन फलेगा-फूलेगा और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य मिल सकेगा।


