सीजी भास्कर, 21 अप्रैल : भारत में 2026 का गर्मी का मौसम (Super El Nino 2026) बेहद खतरनाक होने के संकेत दे रहा है। पिछले दो वर्षों से लगातार बढ़ते तापमान के बीच अब मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार गर्मी का असर और भी गंभीर होगा। अप्रैल 2024 से शुरू हुआ रिकॉर्ड तापमान का सिलसिला अब भी जारी है और इसे जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ सुपर अल नीनो की स्थिति और भी भयावह बना सकती है।
भारतीय मौसम विभाग (India Meteorological Department) के अनुसार मार्च से मई 2026 के बीच देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। खासकर हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्य और पश्चिमी घाट के इलाकों में गर्मी का असर ज्यादा देखने को मिलेगा। यह स्थिति बढ़ते तापमान का खतरा (Super El Nino 2026) और गंभीर बना रही है।
अप्रैल 2024 से लगातार टूट रहे रिकॉर्ड
अप्रैल 2024 से देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान के नए रिकॉर्ड बनते जा रहे हैं। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में औसत तापमान दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा, जबकि पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में यह सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। इसके बाद मई, जून, जुलाई से लेकर दिसंबर तक हर महीने तापमान में नए बदलाव दर्ज किए गए। यह लगातार बढ़ती गर्मी का पैटर्न (Super El Nino 2026) अब एक बड़ी चेतावनी बन चुका है।
2025 की शुरुआत में भी यही स्थिति बनी रही। जनवरी और फरवरी में रिकॉर्ड अधिकतम तापमान दर्ज किया गया, हालांकि मार्च में थोड़ी राहत मिली। लेकिन अब वैज्ञानिकों का मानना है कि 2026 की गर्मी पहले से कहीं ज्यादा तीव्र हो सकती है। यह असामान्य तापमान वृद्धि (Super El Nino 2026) के संकेत दे रही है।
जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो का असर
तापमान बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण मानव गतिविधियों से बढ़ रहा जलवायु परिवर्तन है। वैश्विक स्तर पर तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है, जो एक गंभीर चेतावनी है। इसके साथ ही अल-नीनो और ला-नीना जैसी मौसमी घटनाएं भी मौसम को प्रभावित कर रही हैं। यह जलवायु संकट का प्रभाव (Super El Nino 2026) अब भारत में भी साफ दिखाई दे रहा है।
अल-नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का पानी गर्म हो जाता है, जिससे हवाओं का पैटर्न बदलता है और भारत में गर्मी बढ़ जाती है। वहीं ला-नीना आमतौर पर ठंडक लाता है, लेकिन हाल के वर्षों में इसका प्रभाव कमजोर रहा है। ऐसे में अल-नीनो की वापसी (Super El Nino 2026) गर्मी को और बढ़ा सकती है।
2026 में सुपर अल-नीनो का बड़ा खतरा
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों जैसे NOAA और ECMWF के अनुसार 2026 में अल-नीनो बनने की संभावना काफी ज्यादा है। जून से अगस्त के बीच इसकी संभावना 62 प्रतिशत तक बताई जा रही है, जो आगे बढ़कर 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह संभावित सुपर अल-नीनो (Super El Nino 2026) भारत में गर्मी का बड़ा कारण बन सकता है।
इतिहास में 2015-16, 1997-98 और 1982-83 के सुपर अल-नीनो के दौरान वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि हुई थी। इन वर्षों में सूखा, कमजोर मानसून और फसलों पर बुरा असर देखा गया था। इसी तरह 2026 में भी यह जलवायु असंतुलन (Super El Nino 2026) भारत के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
हिमालय, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट पर ज्यादा असर
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार मार्च से मई 2026 के दौरान देशभर में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा। खासतौर पर हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी घाट में गर्मी का प्रभाव ज्यादा होगा। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में दिन और रात दोनों का तापमान बढ़ेगा। यह क्षेत्रीय तापमान वृद्धि (Super El Nino 2026) लोगों के लिए नई परेशानी लेकर आएगी।
पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिमी घाट के तटीय इलाकों में भी हीटवेव का खतरा बढ़ सकता है। IMD ने चेतावनी दी है कि देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक हीटवेव दिन दर्ज किए जा सकते हैं। यह हीटवेव का खतरा (Super El Nino 2026) स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर असर डालेगा।
कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर असर
भारत की लगभग 52 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई पर निर्भर है। बढ़ती गर्मी फसलों के चक्र को प्रभावित करेगी, जिससे उत्पादन में कमी आ सकती है और महंगाई बढ़ सकती है। यह कृषि पर प्रभाव (Super El Nino 2026) देश की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा, खुले में काम करने वाले मजदूर, बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग इस गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। हीटस्ट्रोक, पानी की कमी और बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है। यह स्वास्थ्य संकट (Super El Nino 2026) सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
अभी से सतर्क रहने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की गर्मी 2024 और 2025 से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अभी से सतर्क हो जाएं। पानी की बचत, पेड़-पौधों का संरक्षण और जलवायु अनुकूल जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। यह बढ़ता जलवायु खतरा (Super El Nino 2026) हमें समय रहते चेतावनी दे रहा है।


