सीजी भास्कर, 21 अप्रैल : भिलाई नगर में ऐतिहासिक जल स्रोत रानी अवंती बाई सरोवर को बचाने के लिए सियासी और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने सरोवर पर मंडराते खतरे को देखते हुए भू-माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह पूरा मामला (Rani Avantibai Sarovar Encroachment) अब क्षेत्र में बड़ा जन मुद्दा बनता जा रहा है।
विधायक ने सरोवर की जमीन पर बिल्डर द्वारा किए जा रहे दावे को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने साफ कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक धरोहर और जल स्रोत को बचाने की लड़ाई (Rani Avantibai Sarovar Encroachment) है।
न्यायालय में मजबूती से लड़ेगा निगम
सरोवर की जमीन को लेकर मामला फिलहाल उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। जानकारी के अनुसार, सरोवर के लिए जमीन दान में दी जा चुकी है, लेकिन अब बिल्डर द्वारा तट और पाल की जमीन पर दावा ठोकते हुए कोर्ट का रुख किया गया है। इस पर विधायक ने तत्काल भिलाई नगर निगम कमिश्नर को तलब कर पूरी स्थिति की जानकारी ली।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि नगर निगम अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखे और इसके लिए वरिष्ठ वकीलों का पैनल तैयार किया जाए। विधायक ने कहा कि सरोवर की एक इंच जमीन भी किसी निजी हाथ में जाने नहीं दी जाएगी। यह कानूनी लड़ाई (Rani Avantibai Sarovar Encroachment) अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है।
‘निजी जमीन’ के नाम पर कब्जे का खेल
विधायक रिकेश सेन ने आरोप लगाया कि अक्सर पुराने तालाबों और जल स्रोतों को ‘निजी जमीन’ घोषित कर उनके अस्तित्व को खत्म करने की साजिश रची जाती है। कोहका स्थित इस सरोवर के साथ भी ऐसा ही प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सरोवर स्थानीय लोगों की जीवनरेखा है और इसे कंक्रीट में बदलने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड की गहन जांच और सीमांकन की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने लाकर इस पूरे विवाद को खत्म किया जाना चाहिए। यह कार्रवाई (Rani Avantibai Sarovar Encroachment) भविष्य में ऐसे मामलों के लिए उदाहरण बन सकती है।
जन समर्थन से बढ़ा दबाव
विधायक की सक्रियता के बाद क्षेत्र में भू-माफियाओं के खिलाफ माहौल बनता दिख रहा है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस पहल का समर्थन किया है। लोगों का कहना है कि सरोवर केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा है।
कुल मिलाकर, रानी अवंती बाई सरोवर को बचाने की यह मुहिम अब जन आंदोलन का रूप लेती दिख रही है। आने वाले दिनों में कोर्ट के फैसले और प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह मामला (Rani Avantibai Sarovar Encroachment) शहर के पर्यावरण और विरासत संरक्षण की दिशा तय कर सकता है।


