सीजी भास्कर 24 अप्रैल I मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति और जिला पुलिस के ‘ऑपरेशन प्रयास’ को बड़ी सफलता मिली है।( Wanted Woman Naxalite Surrenders)
माओवादी संगठन में सक्रिय 1 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस के लगातार दबाव और संगठन के भीतर भेदभाव से परेशान होकर उसने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
देहकी उर्फ जीत्ती ने किया आत्मसमर्पण
आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सली की पहचान देहकी उर्फ जीत्ती के रूप में हुई है। वह रावघाट LOS/SOS की सक्रिय सदस्य रही है। मूल रूप से कांकेर जिले के मदनबाड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम मुंजाल (राउतपारा) की निवासी है।
2010 में संगठन से जुड़ी थी नक्सली गतिविधियों में
जानकारी के अनुसार, देहकी वर्ष 2010 में माओवादी विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन में शामिल हुई थी। शुरुआती समय में उसने मदनबाड़ा क्षेत्र में काम किया, जिसके बाद वह माड़ क्षेत्र में सक्रिय रही और लंबे समय तक रावघाट एरिया कमेटी के तहत विभिन्न गतिविधियों में शामिल रही। (Wanted Woman Naxalite Surrenders)
संगठन में भेदभाव और अत्याचार से थी परेशान : Wanted Woman Naxalite Surrenders
महिला नक्सली ने बताया कि संगठन के भीतर चल रहे अंदरूनी मतभेद और नेतृत्व के उपेक्षापूर्ण व्यवहार से वह परेशान थी। इसके साथ ही माओवादियों द्वारा ग्रामीणों और आदिवासियों पर किए जा रहे अत्याचारों ने भी उसे अंदर से झकझोर दिया।
देहकी उर्फ जीत्ती ने आत्मसमर्पण के दौरान कहा कि नक्सली संगठन की विचारधारा खोखली है और वह अब संविधान पर भरोसा करते हुए मुख्यधारा में लौटना चाहती है।
पुलिस ने बताया बड़ी सफलता
यह आत्मसमर्पण पुलिस महानिरीक्षक बालाजी राव सोमावर के मार्गदर्शन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाय.पी. सिंह के निर्देशन में संभव हुआ। पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पित महिला को पुनर्वास नीति के तहत सभी लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिला पुलिस ने अन्य सक्रिय माओवादियों से भी हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की अपील की है।


