सीजी भास्कर, 26 अप्रैल : देश के सांख्यिकीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारत में पहली बार पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से आयोजित होने वाली जनगणना को अभेद्य और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने एक अत्याधुनिक प्रणाली लागू की है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी को लीक होने से बचाना है। इस पहल (Digital Census Security) के तहत ‘नो लोकल स्टोरेज’ सिस्टम को अपनाया गया है, जिससे जनगणना से जुड़ा कोई भी डेटा प्रगणकों के मोबाइल में स्थायी रूप से स्टोर नहीं होगा। यह जानकारी हर स्तर पर स्वतः डिलीट होती रहेगी और सीधे केंद्र सरकार के सुरक्षित सर्वर पर पहुंचाई जाएगी।
मोबाइल में नहीं रहेगा डेटा, हर स्टेप पर ऑटो-डिलीट
तकनीकी रूप से इस व्यवस्था को इतना सुरक्षित बनाया गया है कि जनगणना कर्मी जब घर-घर जाकर मोबाइल एप में जानकारी दर्ज करेंगे, तो वह डेटा उनके फोन की मेमोरी में सेव नहीं रहेगा। जैसे ही डिवाइस इंटरनेट से जुड़ेगा, जानकारी सीधे सुपरवाइजर के मोबाइल में ट्रांसफर हो जाएगी और कर्मी के फोन से तत्काल हट जाएगी। यही प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी; जैसे ही सुपरवाइजर डेटा को मुख्य सर्वर पर अपलोड करेंगे, उनके डिवाइस से भी जानकारी स्वतः ही समाप्त हो जाएगी। इस तरह की सुरक्षा (Digital Census Security) यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी स्तर पर डेटा का दुरुपयोग या अनधिकृत एक्सेस संभव न हो सके।
पहले चरण में मकानों की लिस्टिंग का लक्ष्य
जनगणना का पहला चरण आगामी 1 मई से शुरू होने जा रहा है, जिसमें मुख्य रूप से मकानों की लिस्टिंग (Houselisting) की जाएगी। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है, जहां प्रत्येक कर्मी को औसतन 200 परिवारों का जिम्मा सौंपा गया है। उन्हें प्रतिदिन लगभग 20 परिवारों की सटीक जानकारी डिजिटल एप में दर्ज करने का लक्ष्य दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया (Digital Census Security) के लिए कर्मियों को न केवल विशेष मोबाइल एप प्रदान किया गया है, बल्कि उन्हें डेटा गोपनीयता बनाए रखने का कड़ा प्रशिक्षण भी दिया गया है। इसके बाद दूसरे चरण में परिवार के सदस्यों का विस्तृत डेटा एकत्र करने का कार्य शुरू होगा।
6 लेयर सिक्योरिटी से डेटा रहेगा सुरक्षित
सरकार ने इस डिजिटल अभियान को साइबर खतरों से बचाने के लिए 6-लेयर सुरक्षा प्रणाली लागू की है। इसका अर्थ है कि डेटा को किसी भी अन्य डिवाइस में मैन्युअली ट्रांसफर करना असंभव होगा और इसे केवल अधिकृत लॉगिन आईडी के माध्यम से ही देखा जा सकेगा। अंतिम स्टोरेज केवल सरकारी सुरक्षित सर्वर पर ही होगा। अधिकारियों का दावा है कि इस व्यापक प्रणाली (Digital Census Security) से साइबर अटैक और डेटा लीक का खतरा न्यूनतम हो जाएगा, जिससे देश के करोड़ों नागरिकों की निजी जानकारी पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित रहेगी।


