सीजी भास्कर, 27 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले (Mandip Khol Cave Chhattisgarh) के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच छिपी रहस्यमयी ‘मंडीप खोल’ गुफा के पट सोमवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। साल में महज एक बार खुलने वाले इस गुफा के द्वार के खुलते ही हजारों की संख्या में भक्त अपनी जान जोखिम में डालकर दर्शन के लिए उमड़ पड़े। अक्ति पर्व के बाद आने वाले पहले सोमवार को होने वाला यह आयोजन आस्था और रोमांच की एक ऐसी मिसाल पेश करता है, जिसे देखकर कोई भी दांतों तले उंगली दबा ले। आज गुफा के खुलते ही पूरा इलाका ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा और चारों ओर भक्ति का सैलाब नजर आया ।
अंधेरी गुफा का रहस्य और 21 जांबाज सदस्यों का दल
परंपरा के अनुसार, इस गुफा में प्रवेश (Mandip Khol Cave Chhattisgarh) करना हर किसी के बस की बात नहीं है। सबसे पहले 21 सदस्यों का एक विशेष दल गुफा के भीतर दाखिल हुआ, जिन्होंने बांस की सीढ़ियों के सहारे ऊंचाई पर स्थित दुर्गम स्थानों तक पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। यह गुफा भीतर से इतनी रहस्यमयी और अंधेरी है कि बिना टॉर्च या कृत्रिम रोशनी के यहां कदम रखना नामुमकिन है। श्रद्धालु मोबाइल टॉर्च और मशालों के सहारे गुफा के उस अंतिम छोर तक पहुंचे, जहां भगवान शिवलिंग विराजमान हैं। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए लोग घंटों इंतजार करते रहे ।
श्रद्धा की अग्निपरीक्षा, 16 बार नदी पार कर पहुंचे भक्त
मंडीप खोल गुफा तक पहुंचने का रास्ता किसी फिल्मी रोमांच से कम नहीं है। भक्तों को घने जंगलों और पथरीले रास्तों के बीच एक ही नदी को करीब 16 बार पार करना पड़ता है। पहाड़ियों की ऊंचाई और नदी का बहाव श्रद्धालुओं की आस्था की कड़ी परीक्षा लेता है, लेकिन शिव भक्ति का उत्साह ऐसा था कि नन्हे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस कठिन सफर को तय कर गुफा (Mandip Khol Cave Chhattisgarh) तक पहुंचे। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, यही वजह है कि दुर्गम रास्ता भी भक्तों के कदम नहीं रोक पाया और वे सुरक्षित गुफा तक पहुंचे ।
प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
हजारों की भारी भीड़ और गुफा (Mandip Khol Cave Chhattisgarh) की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए हैं। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि नदी पार करते समय या पहाड़ी चढ़ते समय कोई अप्रिय घटना न हो। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें भी तैनात हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत इलाज मिल सके। आस्था, रोमांच और परंपरा का यह अद्भुत संगम हर साल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान देता है। शाम ढलने तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और लोग इस रहस्यमयी गुफा के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते हुए अपने घरों को पहुंचे ।


