सीजी भास्कर, 1 मई : राजधानी रायपुर में अंधविश्वास और झोलाछाप इलाज के नाम पर एक महिला की जान लेने के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। रायपुर कोर्ट ने आरोपी महिला ईश्वरी साहू को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा से दंडित किया है। यह मामला न केवल अमानवीयता की पराकाष्ठा है, बल्कि छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत राज्य के पहले प्रमुख फैसलों में से एक माना जा रहा है। (Ishwari Sahu Life Imprisonment)
Ishwari Sahu Life Imprisonment : इलाज के नाम पर अमानवीय कृत्य
यह मामला तब उजागर हुआ था जब योगिता सोनवानी नामक महिला को बीमारी के उपचार के लिए आरोपी ईश्वरी साहू के पास लाया गया था। ईश्वरी खुद को चमत्कारी शक्तियों से संपन्न बताकर लोगों का इलाज करने का दावा करती थी। उसने योगिता का उपचार करने के नाम पर कथित चमत्कारी तेल और खौलते हुए गर्म पानी का इस्तेमाल किया। इस अमानवीय प्रक्रिया के दौरान योगिता की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और अंततः उनकी मृत्यु हो गई।
जांच में अंधविश्वास का खुलासा : Ishwari Sahu Life Imprisonment
पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ईश्वरी साहू अंधविश्वास फैलाकर भोले-भले लोगों को गुमराह करती थी। वह झाड़-फूंक और ढोंग के जरिए लोगों को अपना शिकार बनाती थी। ईश्वरी साहू आजीवन कारावास का यह मामला इसी अमानवीय लापरवाही और कथित चमत्कारी उपचार का परिणाम है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं।
कोर्ट का कड़ा रुख और सजा का विवरण
रायपुर कोर्ट ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को हत्या का दोषी पाया। ईश्वरी साहू आजीवन कारावास (Ishwari Sahu Life Imprisonment) के साथ-साथ कोर्ट ने अन्य अधिनियमों के तहत भी सजा मुकर्रर की है। भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास, धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत 1 वर्ष की सजा और टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम के तहत 1 वर्ष की सजा। यह फैसला समाज में जड़ जमाए अंधविश्वास के खिलाफ एक कड़ा संदेश है कि आस्था के नाम पर जान से खिलवाड़ करने वालों को कानून कभी माफ नहीं करेगा।


