सीजी भास्कर, 3 मई। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चौंकाने वाली खबर सामने (Kuwait Oil) आई है, जहां कुवैत ने अप्रैल 2026 में एक भी बैरल कच्चा तेल निर्यात नहीं किया, जो पिछले करीब 30 वर्षों में पहली बार हुआ है। इस अचानक आए बदलाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है और बाजार में हलचल तेज हो गई है।
30 साल में पहली बार ऐसा क्यों हुआ (Kuwait Oil)
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुवैत में तेल उत्पादन पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन निर्यात लगभग ठप पड़ गया है। उत्पादित कच्चे तेल का कुछ हिस्सा स्टोरेज में रखा जा रहा है, जबकि कुछ को रिफाइंड प्रोडक्ट्स में बदलकर सीमित रूप से बाहर भेजा जा रहा है, लेकिन कच्चे तेल के टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
होरमुज जलडमरूमध्य बना बड़ी वजह (Kuwait Oil)
इस स्थिति के पीछे सबसे बड़ी वजह हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आई बाधाएं बताई जा रही हैं, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। खबर है कि ईरान इस मार्ग से चुनिंदा देशों के जहाजों को ही गुजरने दे रहा है, जिससे कुवैत सहित कई देशों के तेल निर्यात पर असर पड़ा है और टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है।
वैश्विक बाजार पर क्या पड़ेगा असर
ओपेक के प्रमुख सदस्य के रूप में कुवैत की भूमिका काफी अहम है, ऐसे में उसके निर्यात का रुकना वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ा (Kuwait Oil) सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है और कई देशों के लिए ऊर्जा संकट की स्थिति भी बन सकती है।
खाड़ी में बढ़ता तनाव और कूटनीतिक अपील
इस बीच कतर ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर ईरान से अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करने की अपील (Kuwait Oil) की है। साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया गया है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो सके और वैश्विक बाजार में संतुलन बना रहे।


