सीजी भास्कर, 3 मई। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा अब डिजिटल दुनिया में नई पहचान बना रही है, जहां श्री काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ने रिकॉर्ड (Vedic Clock) बनाते हुए लाखों लोगों तक अपनी पहुंच दर्ज कराई है। यह पहल न केवल तकनीक और परंपरा का संगम है, बल्कि भारतीय कालगणना को वैश्विक मंच पर पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
78 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंच (Vedic Clock)
‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 78 लाख से अधिक लोगों तक अपनी पहुंच बनाई है। इस पहल ने देश-विदेश में चर्चा बटोरी और भारतीय समय गणना प्रणाली को लेकर नई जिज्ञासा पैदा की है।
प्रधानमंत्री के अवलोकन के बाद बढ़ी चर्चा
29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद इस वैदिक घड़ी का अवलोकन किया और इसे प्राचीन ज्ञान व आधुनिक विज्ञान का अनोखा संगम बताया। इसके बाद यह पहल सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी और वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई।
परंपरा और तकनीक का संगम (Vedic Clock)
मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के तहत विकसित इस घड़ी को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किया था। 4 अप्रैल 2026 को स्थापित यह घड़ी तिथि, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति जैसी जटिल जानकारियों को सरल रूप में प्रस्तुत करती है।
अब देशभर में लगाने की योजना
इस पहल की सफलता के बाद अब अयोध्या के राम मंदिर और देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में भी ऐसी वैदिक घड़ियां स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे भारतीय कालगणना को और व्यापक पहचान मिल सके।
मोबाइल ऐप से भी मिल रही सुविधा
‘Vikramaditya Vedic Clock’ नाम से इसका डिजिटल ऐप भी उपलब्ध है, जिसमें उपयोगकर्ता तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और 7000 वर्षों का पंचांग देख (Vedic Clock) सकते हैं। यह ऐप 189 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है और एंड्रॉइड व iOS प्लेटफॉर्म पर आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है।
नई पीढ़ी में बढ़ रही रुचि
इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि नई पीढ़ी भी भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को समझने में रुचि रखती है। डिजिटल माध्यम के जरिए वैदिक विज्ञान को सरल बनाकर प्रस्तुत करना इसे और लोकप्रिय बना रहा है।


