सीजी भास्कर, 05 मई : छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा (Anil Tuteja Case Raipur) को बड़ी राहत मिली है। झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज किए गए कथित शराब सिंडिकेट मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। जस्टिस पीपी साहू की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए टुटेजा को राहत प्रदान की है। हालांकि, अन्य मामलों में न्यायिक हिरासत में होने के कारण उनकी तत्काल रिहाई की संभावनाएं अभी कम ही नजर आती हैं। छत्तीसगढ़ के इस चर्चित अनिल टुटेजा केस रायपुर के फैसले को कानूनी गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है।
हाई कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तें
कोर्ट ने अनिल टुटेजा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी रखी हैं। अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो सॉल्वेंट जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया है कि टुटेजा को जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग करना होगा। किसी भी गवाह को डराने, प्रभावित करने या साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने जांच एजेंसी को यह स्वतंत्रता भी दी है कि यदि आरोपी जांच में सहयोग नहीं करता है, तो वे जमानत निरस्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
बचाव पक्ष का ‘एवरग्रीन अरेस्ट’ वाला तर्क
सुनवाई के दौरान अनिल टुटेजा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि यह ‘एवरग्रीन अरेस्ट’ का एक उदाहरण है। बचाव पक्ष का कहना था कि जैसे ही एक मामले में जमानत की स्थिति बनती है, प्रशासन या जांच एजेंसियां उन्हें जेल में बनाए रखने के लिए नया केस दर्ज कर देती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि झारखंड पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है, उसमें मुख्य रूप से टुटेजा का नाम आरोपी के तौर पर शामिल भी नहीं था। इस विवादित अनिल टुटेजा केस रायपुर (Anil Tuteja Case Raipur) की जटिलताओं को देखते हुए कोर्ट ने तथ्यों के आधार पर राहत प्रदान की है।
जेल से बाहर आना फिलहाल मुश्किल
भले ही झारखंड शराब घोटाला मामले में हाई कोर्ट से राहत मिल गई हो, लेकिन अनिल टुटेजा के लिए जेल की सलाखों से बाहर आना अभी भी बड़ी चुनौती है। दरअसल, करीब एक सप्ताह पहले ही चर्चित डीएमएफ घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में हाई कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। वर्तमान में वे ईडी और राज्य की जांच एजेंसियों के घेरे में हैं। इस स्थिति में अनिल टुटेजा केस रायपुर (Anil Tuteja Case Raipur) से जुड़ी यह अग्रिम जमानत केवल एक मामले में उनकी गिरफ्तारी को रोकने का काम करेगी, जबकि अन्य गंभीर आरोपों में वे अब भी कस्टडी में ही रहेंगे।


