सीजी भास्कर, 08 मई। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार के तहत दाखिले की प्रक्रिया को लेकर अब मामला अदालत तक पहुंच (RTE Admission) गया है। कई बड़े निजी स्कूलों में सीटें खाली रहने और सैकड़ों स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं आने की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। अदालत की टिप्पणी के बाद शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों के बीच हलचल तेज हो गई है।
बिलासपुर में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से साफ पूछा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी। कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब शिक्षा व्यवस्था और दाखिला प्रक्रिया दोनों सवालों के घेरे में आ गई हैं। खासकर बड़े स्कूलों में कम आवेदन आने को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता जताई है।
सरकार से मांगी गई पूरी जानकारी RTE Admission
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह शपथ पत्र के जरिए पूरी जानकारी पेश करे। अदालत ने पूछा है कि किस स्कूल में कितनी सीटें थीं और उनमें कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया। इसके साथ ही सरकार को यह भी बताना होगा कि किन बच्चों का दाखिला हुआ और किन सीटों पर अब भी प्रवेश बाकी है।
387 स्कूलों में नहीं आया एक भी आवेदन
सरकार की ओर से अदालत में पेश जानकारी के अनुसार राज्य के 387 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी आवेदन नहीं पहुंचा। वहीं 366 स्कूलों में सीटों की तुलना में आवेदन काफी कम बताए गए हैं। इनमें कई बड़े और चर्चित स्कूलों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसी बात पर हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताया।
अदालत ने उठाए बड़े सवाल (RTE Admission)
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या गरीब परिवारों के बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते या फिर कहीं कुछ और वजह छिपी हुई है। अदालत ने यह भी कहा कि दाखिला प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। इसी वजह से सीट आबंटन की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
10 जुलाई को फिर होगी सुनवाई
मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई तय की गई है। तब तक राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करनी (RTE Admission) होगी। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार अदालत के सामने क्या जवाब रखती है और आरटीई दाखिले की प्रक्रिया में आगे क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।


