सीजी भास्कर, 08 मई : राजधानी रायपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं की गिरती स्थिति और सरकारी अस्पतालों (Congress Protest Health System) की बदहाली को लेकर सियासत गरमा गई है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के बैनर तले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान भाजप सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग उठाई गई। हंगामे की स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
अस्पतालों में न दवा है, न डाक्टर
प्रदर्शन (Congress Protest Health System) का नेतृत्व कर रहे शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। अस्पतालों में न तो जरूरी दवाइयां उपलब्ध हैं और न ही गंभीर बीमारियों की जांच के लिए पर्याप्त उपकरण। स्टाफ की भारी कमी के कारण मरीजों को घंटों भटकना पड़ रहा है।
हमर अस्पताल’ की उपेक्षा का लगाया आरोप
कांग्रेस नेताओं ने पिछली सरकार की योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान शुरू किए गए ‘हमर अस्पताल’ गरीब परिवारों के लिए संजीवनी साबित हुए थे। वहां मुफ्त इलाज और टेस्ट की सुविधाएं मिलती थीं। आरोप है कि वर्तमान भाजपा सरकार में इन अस्पतालों की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिससे ये केंद्र अब बदहाली का शिकार हो रहे हैं।

जिला अस्पतालों की स्थिति पर गंभीर सवाल
घेराव के दौरान कांग्रेस ने जिला अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि सरकार विज्ञापनों में तो बेहतर स्वास्थ्य के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जो गरीबों की जेब पर भारी पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अस्पतालों में डाक्टरों की भर्ती, दवाओं की आपूर्ति और उपकरणों की कमी दूर नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि सरकार अपनी प्राथमिकता बदले और प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य अधिकार सुनिश्चित कराए।


