सीजी भास्कर, 08 मई। छत्तीसगढ़ के वनांचल इलाकों में रहने वाले वनोपज संग्राहकों के बीच इन दिनों एक नई व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दूरदराज गांवों में रहने वाले लोग अब मोबाइल के जरिए बाजार भाव और जरूरी जानकारी सुन सकेंगे। खास बात यह है कि जानकारी उनकी अपनी स्थानीय बोली में मिलेगी, जिससे लोगों के बीच इस पहल को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है।
वन क्षेत्रों में रहने वाले कई परिवार लंबे समय से सही बाजार जानकारी और सरकारी योजनाओं तक आसानी से पहुंच नहीं बना (IVRS Service) पा रहे थे। अब नई व्यवस्था शुरू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि लाखों परिवारों को सीधे फायदा मिल सकेगा। स्थानीय स्तर पर इसे वनांचल में बड़ी डिजिटल पहल माना जा रहा है।
नई संवाद व्यवस्था का शुभारंभ (IVRS Service)
राज्य सरकार ने वनोपज संग्राहकों के लिए नई संवाद सेवा शुरू की है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने नया रायपुर स्थित कार्यालय से इस व्यवस्था की शुरुआत की।
इस पहल के तहत छत्तीसगढ़ वनोपज संरक्षण वाणी और आईवीआरएस आधारित सूचना तंत्र शुरू किया गया है। इसका फायदा 13 लाख से ज्यादा संग्राहक परिवारों को मिलने की बात कही जा रही है।
मिस्ड कॉल से मिलेगी जानकारी
नई व्यवस्था के तहत संग्राहकों को एक नंबर पर मिस्ड कॉल करना होगा। इसके बाद उन्हें वापस कॉल आएगा और वे जरूरी जानकारी सुन सकेंगे। खास बात यह है कि जानकारी हल्बी, गोंडी समेत स्थानीय बोलियों में उपलब्ध कराई जाएगी ताकि ग्रामीण आसानी से समझ सकें।
बाजार भाव और योजनाओं की मिलेगी जानकारी IVRS Service
इस सेवा के जरिए संग्राहकों को जंगल संरक्षण, वनोपज संग्रहण और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा बाजार में चल रहे सही दाम की जानकारी भी सीधे लोगों तक पहुंचेगी। माना जा रहा है कि इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकती है।
लोग अपनी राय भी दे सकेंगे
यह व्यवस्था केवल जानकारी सुनने तक सीमित नहीं रहेगी। उपयोगकर्ता अपनी राय, सुझाव और अनुभव भी रिकॉर्ड कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे संग्राहकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद मजबूत होगा।
आजीविका मजबूत करने पर जोर
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता (IVRS Service) है। आधुनिक तकनीक के जरिए दूरस्थ इलाकों तक जानकारी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल वन आधारित आजीविका को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।


