सीजी भास्कर, 11 मई । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे की तारीख सामने आने के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन दौरे पर रहेंगे, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। (The world is watching the Trump-Xi Jinping meeting)
इस बैठक में ईरान संकट, रूस को समर्थन, व्यापार और एआई तकनीक जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
ईरान मुद्दे पर चीन की भूमिका अहम : The world is watching the Trump-Xi Jinping meeting
अमेरिका लगातार चीन पर आरोप लगा रहा है कि वह ईरान और रूस को ऐसी तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा है, जिसका उपयोग सैन्य गतिविधियों में किया जा सकता है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची हाल ही में बीजिंग पहुंचे थे, जहां उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि चीन ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
चीन ने पहले भी पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने की अपील की थी, लेकिन अमेरिका की नीतियों की आलोचना भी करता रहा है। ऐसे में ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात को कूटनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चीनी कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध
हाल ही में अमेरिका ने चीन की तीन सैटेलाइट कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका का आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें और तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराईं, जिनका इस्तेमाल अमेरिकी सेना पर हमलों में किया गया। इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
व्हाइट हाउस के अनुसार ट्रंप अपने चीन दौरे के दौरान एयरोस्पेस, ऊर्जा और कृषि क्षेत्र से जुड़े समझौतों पर भी चर्चा करेंगे। वहीं चीन की ओर से बोइंग विमान और अमेरिकी सोयाबीन खरीदने को लेकर भी बातचीत जारी है। (The world is watching the Trump-Xi Jinping meeting)
व्यापार और कूटनीति पर भी होगी चर्चा
बीजिंग में ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच औपचारिक बैठक के अलावा कई द्विपक्षीय कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। दोनों देशों के बीच गैर-संवेदनशील वस्तुओं के व्यापार और निवेश सहयोग को बढ़ाने के लिए नए बोर्ड गठित करने पर भी चर्चा हो सकती है।
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि इस दौरे में किसी बड़े निवेश समझौते की संभावना कम है। इसके बावजूद दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या बीजिंग में होने वाली यह मुलाकात ईरान संकट और अमेरिका-चीन संबंधों में नई दिशा दे पाएगी।


