सीजी भास्कर, 14 मई। प्रतीक यादव की मौत को लेकर अब सियासी और कानूनी हलकों में हलचल (Prateek Yadav) तेज हो गई है। शुरुआत में जिस घटना को सामान्य मौत माना जा रहा था, अब उसी को लेकर तरह तरह के सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक लोग लगातार मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
इसी बीच मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। एक मानवाधिकार संगठन ने शिकायत दर्ज कराते हुए मौत को संदिग्ध बताया है। शिकायत के बाद अब पूरे मामले को लेकर नई बहस शुरू हो गई है और जांच को लेकर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
हत्या की आशंका जताते हुए शिकायत : Prateek Yadav
मानवाधिकार के लिए काम करने वाली एक संस्था ने आयोग में शिकायत देकर दावा किया है कि यह मामला सिर्फ सामान्य मौत का नहीं हो सकता। शिकायत में कहा गया है कि कई परिस्थितियां गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि मृतक के शरीर पर चोट के निशान पाए गए थे, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अचानक मौत पर उठे सवाल
शिकायत में बताया गया कि शुरुआती तौर पर मौत की वजह हृदय गति रुकना बताई गई थी। लेकिन शरीर पर मौजूद चोट के निशानों और घटना की परिस्थितियों को देखते हुए मामले को संदिग्ध माना जा रहा है। यह भी कहा गया कि प्रतीक यादव स्वस्थ जीवनशैली के लिए जाने जाते थे, ऐसे में अचानक हुई मौत को लेकर संदेह और गहरा गया है।
स्वतंत्र जांच की मांग
मामले में स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए आयोग से विशेष जांच दल बनाने की अपील (Prateek Yadav) की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और दबाव मुक्त होनी चाहिए। इसके साथ ही अस्पताल और संबंधित मार्ग के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई गई है।
फॉरेंसिक जांच को लेकर भी मांग
याचिका में कहा गया है कि फॉरेंसिक जांच राज्य के प्रभाव से अलग रखी जानी चाहिए। इसके लिए केंद्रीय प्रयोगशाला से जांच कराने की मांग की गई है। मामले को लेकर लगातार नई बातें सामने आने के बाद लोगों की नजर अब आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी चर्चा
प्रतीक यादव का नाम समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के परिवार से जुड़ा होने के कारण यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा (Prateek Yadav) में आ गया है। अब देखना होगा कि आयोग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।



