सीजी भास्कर, 21 मई। सरकारी अस्पतालों में नवजात बच्चों के लिए भेजी गई ओरल पोलियो वैक्सीन की खेप में बड़ी लापरवाही सामने आई है। बस्तर संभाग के कई जिलों में सप्लाई की गई वैक्सीन की कांच की शीशियां टूटी और चटकी हुई मिलीं। मामले का खुलासा होते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तत्काल सभी संदिग्ध वायल्स को इस्तेमाल से रोकने के निर्देश जारी किए हैं। (Polio vaccine vials broken)
कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन पर सवाल : Polio vaccine vials broken
प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि वैक्सीन को अत्यधिक कम तापमान में रखने और खराब परिवहन व्यवस्था के कारण शीशियां क्षतिग्रस्त हुईं। विशेषज्ञों के मुताबिक, शून्य डिग्री से नीचे तापमान पहुंचने पर तरल दवा जम जाती है, जिससे कांच की वायल पर दबाव बढ़ता है और वह टूट सकती है। वहीं खराब सड़कों पर परिवहन के दौरान लगातार झटकों से भी शीशियों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है।
दंतेवाड़ा और बस्तर में सबसे ज्यादा नुकसान
बस्तर संभाग में भेजी गई 40 हजार खुराकों में से करीब 7000 वायल्स टूटी हुई पाई गईं। दंतेवाड़ा जिले में 5000 खुराकों की खेप में 1500 शीशियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त मिलीं, जबकि सुकमा में 50 वायल्स खराब पाई गईं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि टूटी हुई शीशियों को बायो-मेडिकल वेस्ट नियमों के तहत तत्काल नष्ट किया जाए।
लाखों का नुकसान, जांच शुरू : Polio vaccine vials broken
एक पोलियो वायल की कीमत करीब 220 से 250 रुपए बताई जा रही है। ऐसे में हजारों वायल्स के खराब होने से सरकार को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, ये वैक्सीन हैदराबाद और उत्तर प्रदेश की लैब्स से रायपुर स्थित स्टेट वैक्सीन स्टोर लाई गई थीं, जहां से अलग-अलग जिलों में सप्लाई की गई।



