सीजी भास्कर, 15 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मैनपावर सप्लाई घोटाले से जुड़े मामले में आरोपी अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध सामान्य अपराध नहीं होते, बल्कि ये सुनियोजित तरीके से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले गंभीर अपराध हैं। (Manpower scam)
यह मामला CSMCL में कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार ED की कार्रवाई में 28.80 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे। आरोप है कि ओवरटाइम भुगतान के नाम पर भ्रष्टाचार किया गया।
ACB ने इस मामले में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार (Manpower scam) के तहत केस दर्ज किया है। अनवर ढेबर पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर CSMCL के कामकाज और भुगतान प्रक्रिया को प्रभावित किया।
जांच में यह भी सामने आया कि मैनपावर सप्लाई करने वाली निजी एजेंसियों के बिल तब तक पास नहीं किए जाते थे, जब तक वे तय कमीशन नहीं देती थीं। बाद में यह कमीशन बढ़ाकर बिल राशि का एक-तिहाई या उससे अधिक कर दिया गया।
ED की जांच (Manpower scam) में 29 नवंबर 2023 को ट्रैप कार्रवाई के दौरान ईगल हंटर सॉल्यूशंस के कर्मचारियों को 28.80 लाख रुपये की रिश्वत देते हुए पकड़ा गया था। इसी आधार पर आगे की जांच में अनवर ढेबर को 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया।
जमानत याचिका में ढेबर ने इसे राजनीतिक द्वेष और “कस्टडी का एवरग्रीनिंग” बताते हुए फंसाने का आरोप लगाया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसका विरोध किया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे मामलों में केवल इसलिए राहत नहीं दी जा सकती क्योंकि आरोपी प्रभावशाली है या धन सीधे उसके पास से बरामद नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि यह मामला सरकारी खजाने की कथित लूट और जनता के विश्वास से जुड़ा है, इसलिए इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।



