सीजी भास्कर, 15 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए भीषण वेदांता पावर प्लांट हादसे ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस दर्दनाक वेदांता औद्योगिक दुर्घटना जांच (Vedanta Industrial Accident Inquiry) की मांग करते हुए विपक्ष ने सरकार और प्लांट प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 17 मजदूरों की मौत के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे ‘हादसा नहीं बल्कि हत्या’ करार दिया है। वहीं, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने प्लांट में एंबुलेंस तक न होने जैसी बुनियादी सुरक्षा कमियों को उजागर किया है।
1 करोड़ मुआवजे की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि 17 परिवारों का उजड़ना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने वेदांता औद्योगिक दुर्घटना जांच (Vedanta Industrial Accident Inquiry) की आवश्यकता पर जोर देते हुए मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये और घायलों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग सरकार के सामने रखी है। कांग्रेस ने इस मामले की तह तक जाने के लिए 9 सदस्यीय जांच समिति का भी गठन किया है, जिसकी कमान पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को सौंपी गई है।
पुरानी मशीनें और रिपेयरिंग का अभाव
चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव ने प्लांट के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व में यह एथेना पावर प्लांट था, जिसे वेदांता ने खरीदा था। उन्होंने आरोप लगाया कि वेदांता औद्योगिक दुर्घटना जांच (Vedanta Industrial Accident Inquiry) में इस बात को शामिल किया जाना चाहिए कि क्या प्लांट चालू करने से पहले मशीनों की सही तरीके से रिपेयरिंग की गई थी? विधायक के अनुसार, क्षमता से अधिक काम लेने और पुरानी मशीनों के रखरखाव में लापरवाही के कारण ही यह भीषण बॉयलर ब्लास्ट हुआ है।
सिंहदेव और ज्योत्सना महंत के आरोप
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्लांट में एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा नहीं थी, वहां मजदूरों की सुरक्षा का क्या हाल होगा, यह समझा जा सकता है। वहीं, कोरबा सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने याद दिलाया कि वेदांता औद्योगिक दुर्घटना जांच (Vedanta Industrial Accident Inquiry) इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इससे पहले बालको चिमनी हादसे में भी प्रबंधन की लापरवाही सामने आई थी। उन्होंने श्रम विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं।
सरकार और प्रबंधन का पक्ष
हादसे की गंभीरता को देखते हुए श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने जांच के बाद दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सहायता राशि की घोषणा की है, लेकिन विपक्ष इसे नाकाफी बताते हुए वेदांता औद्योगिक दुर्घटना जांच (Vedanta Industrial Accident Inquiry) को जल्द से जल्द निष्पक्ष तरीके से पूरा करने की मांग पर अड़ा है। फिलहाल, प्लांट में अफरा-तफरी का माहौल है और कई घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।


