सीजी भास्कर, 05 जून। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) उन खिलाड़ियों के लिए नई रिटायरमेंट पॉलिसी तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, जो विदेशी टी20 लीगों में खेलने के लिए अचानक भारतीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला कर लेते हैं। हाल ही में हुई एपेक्स काउंसिल की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की गई। बोर्ड का मानना है कि विदेशी लीगों के बढ़ते आकर्षण के चलते कई खिलाड़ी समय से पहले इंटरनेशनल क्रिकेट, घरेलू क्रिकेट और आईपीएल से दूरी बना रहे हैं। (BCCI Retirement Policy)
एपेक्स काउंसिल की बैठक में उठा अहम मुद्दा : BCCI Retirement Policy
बीसीसीआई के मौजूदा नियमों के अनुसार कोई भी सक्रिय भारतीय क्रिकेटर विदेशी टी20 या फ्रेंचाइजी लीग में हिस्सा नहीं ले सकता। चाहे खिलाड़ी इंटरनेशनल टीम का हिस्सा हो, घरेलू क्रिकेट खेल रहा हो या आईपीएल अनुबंध में शामिल हो, उसे विदेशी लीगों में खेलने की अनुमति नहीं है।
हालांकि, नियमों के तहत पूरी तरह संन्यास लेने के बाद खिलाड़ी विदेशी लीगों में खेल सकते हैं। इसी प्रावधान का फायदा उठाकर हाल के वर्षों में कई खिलाड़ियों ने संन्यास के तुरंत बाद विदेशी टीमों और लीगों के साथ करार किए हैं।
5 साल के कूलिंग-ऑफ पीरियड पर विचार
बैठक में इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए एक कड़े नियम पर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, बीसीसीआई ऐसे खिलाड़ियों के लिए ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ लागू करने पर विचार कर रहा है, जो संन्यास के बाद सीधे विदेशी लीगों में खेलने चले जाते हैं।
प्रस्ताव के मुताबिक, ऐसे खिलाड़ियों को भारतीय क्रिकेट में वापसी करने पर कम से कम 5 साल तक प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है। इसका मतलब यह होगा कि वे घरेलू क्रिकेट, आईपीएल या किसी अन्य भारतीय क्रिकेट गतिविधि का हिस्सा नहीं बन सकेंगे।
भारतीय क्रिकेट की मजबूती पर BCCI का फोकस : BCCI Retirement Policy
बीसीसीआई का मानना है कि देश के अनुभवी और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मौजूदगी भारतीय घरेलू क्रिकेट और आईपीएल की गुणवत्ता और प्रतिष्ठा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बोर्ड चाहता है कि खिलाड़ी जल्दबाजी में संन्यास लेने के बजाय भारतीय क्रिकेट को लंबे समय तक अपनी सेवाएं दें।
अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। बीसीसीआई अध्यक्ष और सचिव को इस नीति के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी रिपोर्ट के बाद ही नई रिटायरमेंट पॉलिसी पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।




