सीजी भास्कर, 05 जून : छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आधुनिक और वैज्ञानिक खेती (Scientific Farming Success Story) की नई सोच किसानों की जिंदगी बदल रही है। इसका प्रेरक उदाहरण सुकमा जिले के ग्राम केरलापाल के प्रगतिशील किसान कालेंद्र कुमेटी हैं, जिन्होंने पारंपरिक खेती के सीमित दायरे से बाहर निकलकर वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाया और सफलता की नई मिसाल कायम की। आज वे न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। (Scientific Farming Success Story)
संघर्ष से सफलता तक का सफर : Scientific Farming Success Story
कुछ वर्ष पहले तक कालेंद्र कुमेटी भी सामान्य किसानों की तरह पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। बढ़ती लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन के कारण खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं हो पा रही थी। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने हार मानने के बजाय कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर नई कृषि पद्धतियों की जानकारी हासिल की और वैज्ञानिक तरीके से खेती शुरू की। यही निर्णय उनकी सफलता की नींव साबित हुआ।
Scientific Farming में नैनो तकनीक का सफल प्रयोग
कालेंद्र कुमेटी की सफलता का प्रमुख आधार Scientific Farming और नैनो तकनीक का उपयोग है। उन्होंने पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए Nano DAP और Nano Urea का उपयोग शुरू किया। उनका मानना है कि नैनो उर्वरकों से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व प्रभावी ढंग से प्राप्त होते हैं, जबकि भूमि की प्राकृतिक उर्वरता भी सुरक्षित रहती है। इससे उत्पादन लागत घटती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।
Integrated Farming से बढ़ाई आय के नए स्रोत : Scientific Farming Success Story
केवल धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों तक सीमित रहने के बजाय कालेंद्र ने Integrated Farming मॉडल अपनाया। इसके तहत वे फसल उत्पादन के साथ-साथ सब्जी खेती, फलदार पौधों का रोपण, पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी गतिविधियों को भी जोड़ चुके हैं। इस बहुआयामी कृषि मॉडल से उनकी आय के कई स्रोत विकसित हुए हैं, जिससे आर्थिक स्थिरता और लाभ दोनों में वृद्धि हुई है।
जल संरक्षण और मिट्टी परीक्षण पर विशेष जोर
कालेंद्र अपने खेतों में Drip Irrigation यानी टपक सिंचाई प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। इससे पानी की बचत होती है और फसलों को आवश्यकता अनुसार नमी मिलती है। साथ ही वे नियमित रूप से मिट्टी परीक्षण भी करवाते हैं। मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर ही आवश्यक पोषक तत्वों का उपयोग किया जाता है, जिससे अनावश्यक खर्च कम होता है और भूमि की गुणवत्ता बनी रहती है।
गांव के किसानों के लिए बने प्रेरणा : Scientific Farming Success Story
कालेंद्र कुमेटी की सफलता का असर अब पूरे केरलापाल गांव में दिखाई देने लगा है। उनके अनुभव और उपलब्धियों से प्रेरित होकर अन्य किसान भी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने लगे हैं। वे स्वयं किसानों के बीच जाकर वैज्ञानिक खेती, नैनो उर्वरकों और समन्वित कृषि के फायदे साझा करते हैं। इससे गांव में कृषि के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है और युवा भी खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखने लगे हैं।
कृषि विभाग ने की सराहना
कृषि विभाग के अधिकारियों ने कालेंद्र कुमेटी की मेहनत, नवाचार और दूरदर्शिता की प्रशंसा की है। उनका मानना है कि वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। कालेंद्र कुमेटी आज इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि यदि किसान नई तकनीक, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक सोच को अपनाएं तो खेती न केवल लाभकारी बन सकती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती है।




