सीजी भास्कर, 22 मई। बिलासपुर में शुक्रवार को आए इस फैसले के बाद अदालत परिसर से लेकर आम लोगों के बीच तक इसकी चर्चा (Abortion Case) बनी रही। कई लोग इसे पीड़िता के अधिकारों से जुड़ा अहम फैसला बता रहे थे। मामले को लेकर कानूनी हलकों में भी काफी हलचल नजर आई और लोगों की नजरें पूरे दिन सुनवाई पर टिकी रहीं।
अदालत में सुनवाई के दौरान माहौल काफी संवेदनशील रहा। पीड़िता की तरफ से रखी गई बातों को गंभीरता से सुना गया। बाहर मौजूद लोगों के बीच भी यही चर्चा होती रही कि ऐसे मामलों में अदालत किस तरह पीड़िता की इच्छा और उसकी मानसिक स्थिति को महत्व दे रही है।
पीड़िता ने अदालत में क्या कहा : Abortion Case
युवती ने अपनी याचिका में बताया कि वह जबरदस्ती बनाए गए संबंध के कारण गर्भवती हुई है। उसने अदालत से कहा कि इस गर्भावस्था की वजह से उसे लगातार मानसिक तनाव और परेशानी झेलनी पड़ रही है। उसने यह भी कहा कि वह ऐसे व्यक्ति के बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती जिसने उसकी इच्छा के खिलाफ उसके साथ दुष्कर्म किया। याचिका में मेडिकल विशेषज्ञों की टीम बनाकर जांच कराने की मांग भी रखी गई थी ताकि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी हो सके।
अस्पताल में भर्ती कराने की मांग
पीड़िता की तरफ से अदालत से यह भी निवेदन किया गया था कि उसे जल्द इलाज और प्रक्रिया के लिए बिलासपुर स्थित सिम्स या जिला अस्पताल में भर्ती कराया (Abortion Case) जाए। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित करने का निर्देश दिया। साथ ही डॉक्टरों को कानूनी प्रावधानों के तहत जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए भी कहा गया था ताकि आगे की कार्रवाई में किसी तरह की दिक्कत न हो।
अदालत ने पीड़िता के अधिकार को माना अहम
सुनवाई के बाद वेकेशन बेंच ने कहा कि दुष्कर्म से पीड़ित महिला को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वह अपनी गर्भावस्था को जारी रखना चाहती है या नहीं। अदालत ने माना कि पीड़िता 14 से 16 सप्ताह की गर्भावस्था में है और बिना न्यायिक अनुमति के चिकित्सक इस तरह की प्रक्रिया नहीं कर सकते। मामले की स्थिति, मेडिकल रिपोर्ट और कानूनी पहलुओं को देखते हुए अदालत ने याचिका मंजूर कर ली।
डीएनए साक्ष्य सुरक्षित रखने का आदेश
उच्च न्यायालय ने भ्रूण का डीएनए नमूना सुरक्षित रखने के भी निर्देश (Abortion Case) दिए हैं। माना जा रहा है कि आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया में यह अहम साक्ष्य साबित हो सकता है।



