सीजी भास्कर, 05 मई। दिल्ली में मंगलवार को अदालत परिसर के बाहर सुबह से ही अलग तरह की हलचल (Delhi High Court) दिखी। वकीलों के बीच लगातार बातचीत चल रही थी और हर कोई इस सुनवाई को लेकर उत्सुक नजर आ रहा था। कई लोग एक दूसरे से पूछते दिखे कि आज क्या बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
जैसे ही यह बात सामने आई कि मामले से जुड़े प्रमुख नेता सुनवाई में शामिल नहीं हुए, माहौल और ज्यादा गंभीर हो गया। लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि अदालत इस गैर मौजूदगी को कैसे देखेगी और इसका आगे क्या असर पड़ेगा।
अदालत का सख्त रुख Delhi High Court
अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक से जुड़े आबकारी नीति मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि अब इनकी ओर से कोई भी जवाब पेश किया गया तो उसे अभिलेख में शामिल नहीं किया जाएगा।
निष्पक्ष सुनवाई के लिए कदम
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक अहम फैसला लेते हुए एक स्वतंत्र कानूनी सहायक नियुक्त करने का निर्णय लिया। इसका मकसद यह है कि मामले की सुनवाई पूरी तरह संतुलित और सही दिशा में आगे बढ़े।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें इन नेताओं को आरोपों से राहत दी गई थी। ऐसे में उच्च न्यायालय इस मामले की गंभीरता से दोबारा जांच कर रहा है।
गैर मौजूदगी बनी कारण (Delhi High Court)
सुनवाई में संबंधित पक्षों की अनुपस्थिति को अदालत ने गंभीरता से लिया। इसी वजह से उनके जवाब दाखिल करने के अधिकार को समाप्त कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अब कोई भी जवाब दिया गया तो उसे दर्ज नहीं किया जाएगा।
अगली सुनवाई कब
अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को तय की गई है। उस दिन आगे की प्रक्रिया को लेकर निर्णय (Delhi High Court) लिया जाएगा और केस की दिशा साफ होगी। दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़ा यह मामला पहले ही चर्चा में बना हुआ था और अब अदालत के इस फैसले के बाद इसकी अहमियत और बढ़ गई है। आने वाले समय में इस पर सबकी नजर बनी रहेगी।


